स्थापना के 73 साल बाद भी प्रदेश के इस जिले को विकास की आस

गुना जिले का आज 28 मई को स्थापना दिवस है। गुना बुद्धिजीवियों, राजनेताओं से भरा पड़ा है। जानिए गुना जिले के बारे में....

गुना, संदीप दीक्षित। गुना जिले का आज स्थापना दिवस (Guna Foundation Day) है। 73 वर्ष पहले 28 मई 1948 को गुना जिला अस्तित्व में आया। ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से देशभर में चर्चा का केंद्र रहे गुना जिले से तब से अब तक कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। स्थापना के बाद से गुना को सबसे ज्यादा प्रभावित विभाजन के दंश ने किया है। कई सरकारी विभागों का रुतबा छिना तो कभी विकास के नाम पर जिले को दो टुकड़ों में बांटते हुए चंदेरी जैसी प्राचीन नगर को छीन लिया।

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एक समय था जब गुना, अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी और राजगढ़ जिला न्यायालय का मुख्यालय यहां होने से कानून के बड़े-बड़े जानकार और विद्वान अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। इसके बावजूद गुना का महत्व प्रदेश और देश के मानचित्र पर बिल्कुल भी घटा नहीं है। राजनीतिक दृष्टि से गुना जिला लगातार देश में चर्चा का विषय बना रहा है। वर्तमान में भी राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की वजह से गुना हमेशा ग्लोबल मीडिया की नजर में रहता है। भारत के सर्वोच्च न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभालकर डॉ. रमेशचंद्र लाहोटी ने जिले का गौरव बढ़ाया। अविभाजित प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री गोपीकृष्ण विजयवर्गीय भी गुना के निवासी रहे हैं।

सालों बाद भी नहीं विकास

73 साल की आयु होने के बावजूद गुना जिले को विकास को लेकर कई उम्मीदें हैं। सरकारी मेडीकल और इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं है। रोजगार के लिए बड़े-बड़े संयंत्रों का अभाव है। प्राचीन धरोहरों का प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है। ऐसी अनेक समस्याओं से गुना जूझ रहा है।

गुना जिले का इतिहास

गुना जिले के इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो अंग्रेजी शासनकाल में सबसे पहले मुख्यालय गुना में ही 5 नवंबर 1922 को स्थापित हुआ। इसके बाद 19वीं सदी के पूर्व गुना ईसागढ़ (अब जिला अशोकनगर में स्थित) जिले का एक गांव था, लेकिन सिंधिया के सेनापति जोन वेरेस्टर फिलोर्स ने खींची राजाओं से इसे जीतकर भगवान यीशू के सम्मान इसे ईसागढ़ नाम दे दिया। सन् 1844 में गुना में ग्वालियर की फौज भी रह चुकी है। जिसके विद्रोह के कारण 1850 में गुना को अंग्रेजी फौज की छावनी में तब्दील कर दिया गया। 1922 में छावनी को गुना से ग्वालियर स्थानांतरित करने के बाद 5 नवंबर 1922 को जिला मुख्यालय बजरंगगढ़ से गुना स्थानांतरित कर दिया गया। वर्ष 1937 में जिले का नाम ईसागढ़ के स्थान पर गुना रखा गया और ईसागढ़ एवं बजरंगगढ़ को तहसील बना दिया गया। अंतत: 1948 में गुना को दोबारा जिला होने का गौरव प्राप्त हुआ और इसे स्वतंत्र मुख्यालय घोषित किया गया। हालांकि उतार-चढ़ाव का दौर फिर शुरु हुआ और वर्ष 2003 में अशोकनगर को गुना से अलग कर इसमें शामिल कई प्राचीन क्षेत्रों को छीन लिया गया।

गुना की भौगोलिक स्थिति

वर्तमान में गुना जिले में गुना, आरोन, चांचौड़ा, बमौरी, मधुसूदनगढ़, राघौगढ़ और कुंभराज सहित 7 तहसीलें हैं। वहीं पांच अनुविभाग में जिला बंटा हुआ है। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक हमारी जनसंख्या 12 लाख 41 हजार 519 है। गुना का क्षेत्रफल 6390 वर्ग किलोमीटर है। जिसकी सीमाएं अशोकनगर, शिवपुरी, राजगढ़ और बारां जिलों से लगती हैं। गुना का मालवा का प्रवेश द्वार कहे जाने का भी सम्मान मिला हुआ है।