कई आदिवासी ग्रामों में अब भी नहीं मान रहे ग्रामीण, सेंपलिंग और वैक्सीनेशन के लिए अधिकारी कर रहे जागरूक

होशंगाबाद, राहुल अग्रवाल। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जहाँ हर जगह जन जीवन अस्तव्यस्त कर दिया है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रो में भी तेजी से संक्रमण बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। इटारसी के केसला ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले वन ग्राम घासई व जालिखेड़ी में आदिवासी लोगों में कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता की बेहद कमी है। यहां अब भी घर में बीमार होने के बाद व्यक्ति का घरेलू इलाज किया जा रहा है।

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लोगों के बीमार होने और घर पर ही इलाज कराने की सूचना मिलने पर प्रशासनिक अमला सेम्पलिंग ओर टीकाकरण के लिए प्रेरित करने पहुँचा तो लोगों में इन सब को लेकर काफी भ्रम की स्थिति देखने को मिली। अतिरिक्त तहसीलदार निधि लोधी ओर जनपद सीइओ बंदना कैथल के बार बार समझाने पर लोग बमुश्किल राजी हुए। तपती धूप और नोतपे के बीच अधिकारी, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता पैदल ही गावों में घूम घूम कर लोगों के सेम्पल लिए।

जब प्रशासन की टीम जब वन ग्राम घासई व जालिखेड़ी में पहुंची और वहाँ उपस्थित आदिवासी समूहों से जब कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए कहा तो पहले तो सभी ने साफ मना कर दिया और बाद में बेतुके तर्क देने लगे। कोई बोला यह वैक्सीन हमे बीमार कर देगी तो किसी का कहना था कि वैक्सीन लगवाने से कोरोना हो रहा है। अतिरिक्त तहसीलदार निधि पटेल के निवेदन के बाद बमुश्किल लोग सेंपलिंग और वैक्सीनेशन के लिए राजी हुए।