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बैकफुट पर Indore Municipal Corporation और सरकार, टैक्स वृद्धि स्थगित, भूपेंद्र सिंह ने जारी किये आदेश

Written by:Pratik Chourdia
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इंदौर, आकाश धौलपुरे। मध्यप्रदेश सरकार (madhya pradesh government) को सबसे ज्यादा राजस्व  देने वाली प्रदेश की सबसे बड़ी इंदौर (indore) नगर निगम (Indore Municipal Corporation) द्वारा 1 अप्रैल यानी आज से कचरा संग्रहण शुल्क, जल कर की वृद्धि को स्थगित कर दिया गया है। दरअसल, निगम द्वारा लगाए गए टैक्स के विषय पर भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, सांसद शंकर लालवानी व जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि प्रदेश सरकार से चर्चा की गई है और नए सीवरेज टैक्स के साथ ही अन्य करो में बढ़ोतरी को फिलहाल, स्थागित कर दिया गया है। प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने रेसीडेंसी कोठी पर इस बात की घोषणा कर कहा कि उनकी सीएम सहित अन्य मंत्रियों से चर्चा हुई है और सरकार ने कर वृद्धि को स्थागित कर दिया। मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि मंत्री भूपेंद्र सिंह से चर्चा के बाद टैक्स बढ़ोतरी स्थगित कर दी गई है। उधर नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस आशय के आदेश भी जारी कर दिए हैं।

बता दें कि इसके पहले निगम ने अफसरशाही दिखाते हुए आदेश जारी कर दिया था इंदौर में जलकर 200 से बढ़ाकर 400 रुपये, कचरा संग्रहण 150 की बजाय 300 रुपये कर दिया था वही नए कर के रूप में सीवरेज टैक्स 240 रुपये लागू कर दिया था। बिना जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर अचानक लगाए करो को लेकर इंदौर नगर निगम और प्रदेश सरकार का विरोध कांग्रेस ने शुरू कर दिया था। वही बीजेपी सांसद सहित पूर्व महापौर मालिनी गौड़, कृष्णमुरारी मोघे समेत बीजेपी विधायको ने फैसले पर आश्चर्य जताया था और सभी ने सीधे सीएम से चर्चा कर अपना पक्ष रखा था।

आम जनता पहले ही कोरोना काल से त्रस्त है ऊपर से बढ़ती महंगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रखी है ऐसे में कांग्रेस निकाय चुनाव के लिहाज से जनता का समर्थन हासिल करने के लिए भी जुट गई थी। ऐसे में माना जा रहा था कि देश के नम्बर 1 शहर इंदौर के नगर निगम में नगरीय निकाय चुनाव के लिहाज से कांग्रेस बड़ा फायदा उठा सकती है लिहाजा, सरकार को भी जनता के आगे झुकना पड़ा। वहीं कांग्रेस विधायक और महापौर पद के प्रत्याशी संजय शुक्ला ने तो सीधे सरकार से मांग कर डाली थी कि पहले सरकार निगम के 600 करोड़ रुपये लौटाए उसके बाद टैक्स पर बात करे।

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इधर, आम जनता ने भी मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये निगम का विरोध करना शुरू कर दिया था जिसके चलते ये तो साफ हो रहा था कि जनता की नाराजगी को दूर करने के लिए निगमायुक्त प्रतिभा पाल किसी अन्य विकल्प पर जा सकती है लेकिम बीजेपी नेताओं के विरोध के बाद निगमायुक्त की एक न चली और सरकार ने सीधे कर वृद्धि पर रोक लगाते हुए ऐसे फरमान को स्थागित कर दिया। दरअसल, इस पूरे मामले में निगमा आयुक्त और अन्य अधिकारियों पर सवाल इसलिए भी उठ रहे है क्योंकि किसी ने भी जनप्रतिनिधियो से चर्चा नही की अपनी मर्जी से ऐसा टैक्स लगा दिया कि चौतरफा विरोध शुरू हो गया और आखिर में निगम और प्रदेश सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

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