इंदौर पुलिस ने किया कुछ ऐसा कि हो रही सब जगह चर्चा, जाने क्या है मामला

इंदौर, आकाश धोलपुरे। इंदौर (Indore) का तेजाजी नगर पुलिस थाना इन दिनों चर्चाओं में जिसकी वजह है यहां आने वाले आपराधिक मामले। एक तरफ तो यहां की पुलिस दुष्कर्म के आरोपी सरपंच पति को ढूंढने में दिन रात पसीना बहा रही है तो वहीं दूसरी ओर अब तेजाजी नगर पुलिस ने समझाईश की एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी तारीफ हर कोई कर रहा है।

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दरअसल, जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक इंदौर पुलिस (Indore Police) ने एक मिसाल पेश करते हुए नियमों को धता बताने वाले एक युवक युवती को समझाइश देकर रुखसत कर दिया गया। जी हां ये सच है ये हम नही बल्कि तेजाजी थाना प्रभारी आर.डी. कानवा स्वयं कह रहे है। उनके हिसाब से आर्मी जैसे वाहन और वेशभूषा वाले युवक युवती आरोपी नही है बल्कि वो तो बायपास से गुजरते मिले थे। टीआई ने कहा कि उन्होंने उनकी गाड़ी में परिवर्तन कराया गया था। कुछ केमोफ्लाइज आर्मी जैसी गाड़ी बनवा ली थी और उसमें स्टार वगैरह लगवा लिए थे। उन्होंने खुद बताया गाड़ी पर मुंबई एडवेंचर फोर्स लिखा हुआ था वही गाड़ी के सामने ब्लैक और रेड कलर की बत्ती थी उन्हें जांचा गया और वो एडवेंचर से जुड़े थे जिसे देखकर कोई भी आम आदमी उनको मिलेट्री का समझ सकता है। टीआई कानवा के मुताबिक युवक युवती एडवेंचर से जुड़े है और जंगल कैम्प लगाते है। पुलिस ने बकायदा उनकी तस्दीक भी की और ये पाया कि वो जंगल मे कैम्प लगाते है। इसके बाद पुलिस ने उन लोगो को समझाइश दी कि इस तरह से गाड़ी में परिवर्तन की अनुमति आरटीओ भी नही देता है। जिसके बाद युवक युवती गाड़ी में बदलाव लाने की बात पुलिस को कही और पुलिस मान गई। टीआई आर.डी.कानवा खुद कह रहे है कि इसके बाद उन्हें समझाइश देकर रूखसत कर दिया गया।

इधर, इंदौर पुलिस की इसी समझाइश और रुखसती को लेकर सवाल ये उठ रहे है कि मुंबई एडवेंचर फोर्स की बजाय मिनी मुंबई एडवेंचर फोर्स होती तो क्या उस वक्त भी जंगल कैम्प के नाम पर समझाईश और रुखसती की जाती ?

तेजाजी नगर थाना प्रभारी आर. डी. कानवा ने ये भी मीडिया को बताया कि वो लोग एडवेंचर वगैरह का काम करते है और ग्रुप के साथ जंगल कैम्प लगाते है। उस ग्रुप का नाम पायलेट ग्रुप है जिसमे कुछ लोग जुड़े हुए है जो जंगल मे अपना कैम्प लगाते है और ट्रेकिंग वगैरह करते है। पुलिस के मुताबिक दोनों युवक युवती की तस्दीक कर ली गई है इतना ही नही पुलिस ने पहनावे को लेकर किये गए सवाल के जबाव में बताया कि उन लोगो ने कैमोफ्लाइज लोअर और ग्रीन कलर का शर्ट पहनकर रखा था। वही पुलिस ने ये भी माना कि कोई संधिग्ध स्थिति नही मिली थी इसलिये उन्हें समझाइश देकर छोड़ दिया गया और उन लोगो ने ये भी कन्फेस किया कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति नही करेंगे क्योंकि उन्हें इस बात की जानकारी नही थी और वो वाहन में बदलाव कर देंगे।

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अब ये तो रही थाना प्रभारी साहब की वास्तविक और तार्किक बाते ! लेकिन इस पूरे मामले में सवाल ये उठ रहा है कि क्या कोई एडवेंचर करने वाला भारतीय सेना की पहचान को तोड़ मरोड़कर इस्तेमाल कर ले तो उसके खिलाफ कार्रवाई नही होगी क्योंकि जंगल सफारी के शौकीन न सिर्फ कानून बल्कि सेना के कानून को भी धता बता सकते है क्या ? क्या इस मामले में कार के कांचों की काली रिबिन उतरवाने वाली पुलिस का ये कर्तव्य नही बनता था कि वो तुरंत आरटीओ को सूचित करे और कार्रवाई करे ताकि जंगल सफारी के नाम पर सफर करने वालो की असलियत उजागर हो सके। वही सवाल ये भी है कि एडवेंचर के जमाने मे देश की सेना की हूबहू नकल करने वालो की अक्ल ठिकाने नही लगाई जा सकती थी क्या ? क्योंकि सवाल, पुलिस की लाख तस्दीक के बावजूद सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। लेकिन हम तो ये ही कहेंगे कि इंदौर पुलिस की शान तेजाजी नगर पुलिस हमेशा खबरदार है और दरियादिली दिखाने के मामले में वो मिनी मुंबई तो छोड़े मुम्बई पुलिस से भी आगे है। बहरहाल, इस खबर के बाद मुम्बई पुलिस को सीख लेना चाहिए क्योंकि हर सवाल का जबाव इंदौर पुलिस के तेजाजी नगर थाने पर है।

क्या कर सकती थी पुलिस

* तुरंत आरटीओ कार्यालय पर सूचना देकर वाहन की जब्ती की जा सकती थी।

* वाहन में सवार युवक- युवती के साथ जंगल में जाकर वर्तमान कैंप की हकीकत पता लगाया जा सकता था।

* पुलिस को तुरंत कार्रवाई कर पूछताछ के लिए थोड़ा समय ओर लेना था।

* सवाल सुरक्षा से जुड़ा है लिहाजा, कट कॉपी पेस्ट की बजाय सेना को सूचित करना था।

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