कोरोना संकटकाल के बीच इंदौर का ये डॉक्टर पेश कर रहा मिशाल

इंदौर। आकाश धोलपुरे।

कोरोना काल मे डॉक्टर देवदूत के रूप में इंसानों की सेवा कर रहे है। इधर, इंदौर में एक ऐसे डॉक्टर भी है जो उम्र के एक पड़ाव को पार करने के बावजूद पूरे जोश और विश्वास के साथ हमेशा की तरह अपनी ड्यूटी निभा रहे है और ये ही वजह है कि वो प्रदेश के युवा और अनुभवी डॉक्टरों के लिए एक मिशाल के रूप सामने है। दरअसल, ये डॉक्टर जब से ड्यूटी पर तैनात है तब से ही इन्होंने एक भी दिन का अवकाश नही लिया है और इनका काम भी बेहद पेंचीदा है। ये डॉक्टर मौत के बाद उन लाशो का पोस्टमार्टम करते है जिनकी मौत को लेकर संशय की स्थिति होती और कोई कानूनी पेंच फंसा होता है।

दरअसल, हम बात कर रहे इंदौर के जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर भरत वाजपेयी की जो बीते 40 साल से भी अधिक समय से शासकीय डॉक्टर के रूप में सेवा दे रहे है और आज भी करीब 60 साल से अधिक की उम्र में एक मिशन के तहत काम कर रहे है। सालों से लगातार पोस्टमार्टम विभाग में कार्यरत डॉक्टर वाजपेयी अब तक 12000 से अधिक पोस्टमार्टम कर चुके है वही उम्र के इस पड़ाव में होने के बावजूद भी वो कोरोना काल में लगातार ड्यूटी दे रहे है। अपनी टीम के साथ कोरोना संकट के बीच डटे हुए डॉक्टर भरत वाजपेयी की नियमितता, कार्य के प्रति समर्पण भाव और ईमानदारी ही उनकी शक्ति है जिसके चलते उन्हें कई अवार्ड मिल चुके है। इन अवार्डों में से एक अवार्ड है बिना छुट्टी लिए लगातार काम करना जो डॉक्टर के जोश और जुनून को दिखाने के लिए काफी है। हालांकि काम के दौरान उन्होंने एक माह पहले तक एक भी छुट्टी नही ली थी लेकिन पिछले दिनों उन्हें पैरालिसिस अटैक आने के कारण, ड्यूटी से एक महीने का रेस्ट लेना पड़ा और अब उस बीमारी को हरकार वह एक बार फिर ड्यूटी पर तैनात हो गए है। डॉक्टर भरत वाजपेयी की माने तो कोरोना काल मे पोस्टमार्टम केसों में जरूर कमी आई है क्योंकि पहले आत्महत्या, हत्या और अन्य तरह के मामले लगातार सामने आते थे लेकिन कोरोना काल मे इन सबमें कमी आ गई है। वही जब उनसे पूछा गया कि क्या इस दौर में आपको ड्यूटी करने में डर नही लगता तो उनका कहना था कि वो और उनकी टीम पोस्टमार्टम के दौरान काफी एतियाहत बरतकर ड्यूटी करती है। चेहरे पर मास्क, हाथों में ग्लब्स और सेनेटाइजर का उपयोग वो कोरोना काल के पहले से ही उपयोग करते आये है और साथ ही स्वच्छता का बारीकी से ख्याल रखने के कारण अभी तक वो संक्रमण वाली किसी बीमारी का शिकार भी नही हुए है। डिकम्पोज बॉडी और अन्य तरह की बीमारियों से ग्रसित शवो का पोस्टमार्टम कर चुके डॉक्टर वाजपेयी कोरोना काल मे सुरक्षा के संसाधनो का उपयोग कर सुरक्षित तरीके से ड्यूटी कर रहे है जिसके चलते उन्हें किसी तरह का कोई डर ड्यूटी के दौरान नही लगता है और ये ही वजह है कि लॉक डाउन के दौरान भी वो लगातार ड्यूटी दे रहे है।

वही डॉक्टर भरत वाजपेयी के साथ पोस्टमार्टम विभाग में पदस्थ कम्पाउंडर किशोर करोसिया का भी कहना है कि डॉक्टर वाजपेयी 43 साल से ड्यूटी कर रहे है और इस दौरान उनके जोश व जुनून में कोई कमी नही आई है। इतना ही नही कोरोना संक्रमण के प्रभाव को देखते हुए गम्भीर मामला आता भी है तो डॉक्टर वाजपेयी पहले से ही सभी को अलर्ट कर देते है जिसके कारण किसी तरह की कोई समस्या नही आती है।

उम्र के इस पड़ाव में एक डॉक्टर के जुनून से वो जूनियर व सीनियर डॉक्टर प्रेरणा ले सकते है जिनके मन मे संकट के इस काल मे कई सवाल उठ रहे है।