मध्य प्रदेश हाईकोर्ट : मातृत्व अवकाश हर महिला का मौलिक अधिकार, हर हाल में मिले लाभ

जबलपुर,संदीप कुमार। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगत की एकलपीठ ने महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश प्रदान करने का आदेश दिया है, उमरिया पीएचई विभाग में जिला परामर्शदाता (संविदा) पर कार्यरत सुषमा द्विवेदी ने मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं दिये जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सुषमा की याचिका स्वीकार करते हुए मातृत्व अवकाश प्रदान करने का कोर्ट ने आदेश पारित किया है। याचिकाकर्ता ने संविदा सेवा के दौरान मातृत्व अवकाश प्रदान किए जाने के लिए आवेदन दिया था, जिसे कार्यपालन यंत्री उमरिया ने ये कहते हुए निरस्त कर दिया था कि संविदा कर्मचारी के संदर्भ में कोई विभागीय सर्कुलर मातृत्व अवकाश प्रदान करने के लिए नहीं मिला है।इस आदेश के विरुद्ध सुषमा ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

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कोर्ट में दायर याचिका में वकील आशीष त्रिवेदी ने कहा कि याचिकाकर्ता सुषमा द्विवेदी, जो पीएचई विभाग की एक संविदा कर्मचारी हैं। उन्होंने शहडोल जिले के उमरिया में पीएचई कार्यालय में कार्यकारी अभियंता के 6 फरवरी, 2018 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं दिया गया था। वकील ने कहा कि 1 दिसंबर 2016 से 31 मई 2017 तक मातृत्व अवकाश के लिए उसके आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि वह एक संविदा कर्मचारी थी और उसे मातृत्व अवकाश देने के लिए कांट्रैक्ट में कोई शर्त नहीं थी। वकील आशीष त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम बनाम महिला श्रमिक (मस्टर रोल) और वर्ष 2000 के एक अन्य मामले में कहा था कि मातृत्व अवकाश रोजगार की प्रकृति के साथ नहीं बदलता है। उन्होंने कहा था कि नियोक्ता और अदालतें संवैधानिक योजना के तहत जीवन के अधिकार, सम्मान के साथ जीने का अधिकार और मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए बाध्य हैं।