जबलपुर- कोरोना से स्टाफ नर्स की मौत, नर्सेस एसोसिशन ने की 55 लाख मुआवजे की मांग

जबलपुर- कोरोना से स्टाफ नर्स की मौत, नर्सेस एसोसिशन ने की 55 लाख मुआवजे की मांग

जबलपुर, संदीप कुमार। मेडिकल कॉलेज में कोरोना महामारी के बीच आज एक और नर्स की मौत हो गई। स्टाफ नर्स मीना सिंह सराठे (40 वर्ष) की मौत से मेडिकल कॉलेज में शोक की लहर दौड़ गई है। मीना सिंह को इलाज के लिए सुपर स्पेशियल्टी अस्पताल के कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया था पर उन्हें नही बचाया गया और रविवार तड़के सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

इंदौर: रेमडेसिवीर की कालाबाजारी जारी, 2 गिरोह के 6 सदस्य इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार

मीना सिंह की असमय हुई मौत के बाद नर्सेस एसोसिएशन ने परिवार को 55 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। इसी के साथ शव को तिरंगा में लपेटकर कोरोना योद्धा सम्मान देने तथा अनुकंपा नियुक्ति की मांग भी राज्य सरकार से की है। मेडिकल कॉलेज में अब तक कोरोना से तीन स्टाफ नर्सों की मौत हो चुकी है, जबकि पिछले साल भी सरिता मरावी और सीमा विनीत ने कोरोना मरीजों की सेवा के दौरान संक्रमण की चपेट में आकर अपनी जान गंवाई थी।

मृतक मीना सिंह के पति भी कोरोना पॉजिटिव है जिनका इलाज मेडिकल कॉलेज में किया जा रहा है। मीना सिंह की मौत के बाद उसके दो मासूम बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है। नर्सेस एसोसिएशन ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि कोरोना के कारण जान गंवाने वाली स्टाफ नर्स मीना सिंह सराठे के कारण उनके पति और सास भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। पति की हालत भी गंभीर हो रही है जिन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ऐसे में परिवार को सहायता दी जानी चाहिए।

मीना सिंह का एक सात साल बेटा और डेढ़ साल की बेटी है जो अभी घर पर अकेले हैं। नर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि मेडिकल प्रशासन मरणोपरांत मीना को कोरोना योद्धा का सम्मान देकर शव को तिरंगे में लपेटकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करे। परिवार के सदस्यों को 55 लाख रुपये मुआवजा देने के साथ परिवार के किसी एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी की गई है, ताकि भविष्य में बच्चों के भरण-पोषण में कठिनाई का सामना न करना पड़े।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल नर्स स्वास्थ संगठन की अध्यक्ष सुनीला इशादीन ने बताया कि मीना सिंह को थायराइड और डायबिटीज की बीमारी थी। उन्हें वैक्सीन भी नहीं लगाई गई थी। कोविड वार्ड में उनकी ड्यूटी लगाई जा रही थी तब उन्होंने अपनी बीमारी और टीकाकरण न होने का हवाला देकर ड्यूटी न लगाने की अपील की थी, जिसे मेडिकल प्रशासन ने अनसुना कर दिया था। सुनीला इशादीन ने कहा कि कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी करने वाले अमले को क्वॉरेंटाइन अवधि के लिए अलग से विश्राम स्थल और भोजन की व्यवस्था मेडिकल प्रशासन द्वारा नहीं की जा रही है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews