Jabalpur : संयुक्त संचालक के कारनामे से विभाग में हड़कंप, पूर्व मंत्री ने की शिकायत

पूर्व राज्य मंत्री की भेजी गई शिकायत में सबसे अहम शिकायत फोटोग्राफर (Photographer)को अलग करना है।

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जबलपुर, संदीप कुमार। लोक शिक्षण जबलपुर संभाग (Public Education Jabalpur Division) के संयुक्त संचालक राजेश तिवारी का एक और नया कारनामा अब सामने आया है, जिसके बाद भाजपा (BJP) के पूर्व राज्यमंत्री ने संयुक्त संचालक के खिलाफ डीपीआई कमिश्नर (DPI Commissioner) को 9 बिंदुओं की शिकायत भेजकर स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) में हड़कंप मचा दिया है। पूर्व राज्य मंत्री की भेजी गई शिकायत में सबसे अहम शिकायत फोटोग्राफर (Photographer)को अलग करना है।

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शिकायत में कहा गया है कि शासकीय स्कूलों (Government schools) व कार्यालयों की फोटोग्राफी करने वाले संतोष दुबे ने संयुक्त संचालक राजेश तिवारी के घर में आयोजित हुए निजी कार्यक्रम की फोटोग्राफी की थी, जिसका बिल 11 हजार रूपए हुआ था। फोटोग्राफर जब 11 हजार का बिल लेकर संयुक्त संचालक के पास पहुंचा तो संयुक्त संचालक ने 7 हजार देकर चलता कर दिया। हैरानी की बात तो यह है कि फोटोग्राफर ने इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से की तो संयुक्त संचालक ने उसे शासकीय कार्यक्रमों की फोटोग्राफी से अलग करवा दिया।

रिश्वतखोर बाबू के साथ याराना मंहगा पड़ा

मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ (MP Third Class Government Employees Union) के प्रांतीय महामंत्री योगेंद्र दुबे ने कहा कि संयुक्त संचालक राजेश तिवारी को सेवानिवृत्त (Retired) के कुछ दिन ही शेष है लेकिन और इस बीच इनके कारनामों का लगातार खुलासा हो रहा है।

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हाल ही में लोक शिक्षण आयुक्त जबलपुर आई थी इस दौरान वह झोतेश्वर दर्शन के लिए पहुंची थी उनके साथ संयुक्त संचालक जबलपुर संभाग(Joint Director, Jabalpur Division) , कटनी जिला शिक्षा अधिकारी(Katni District Education Officer) और रिश्वत (Bribe) के आरोप में निलंबित(suspended) हुए कटनी शिक्षा विभाग के बाबू प्रशांत चनपुरिया शामिल थे। निलंबित बाबू को लेकर साथ में घूमना संयुक्त संचालक को उस समय मंहगा पड़ गया जब सोशल मीडिया (Social Media) पर एक फोटो वॉयरल (Photo Viral) हो गई। रिश्वतखोर बाबू से संयुक्त संचालक का याराना है।

शिकायतों के अन्य बिंदु

  •  शासकीय कार्य में संयुक्त संचालक द्वारा नहीं लेना, भ्रष्टाचार को ज्यादा महत्व देना।
  • अनुकंपा नियुक्ति, क्रमोन्नति के प्रकरणों को बेवजह ही रोककर रखना।
  • साल 2019 में हुए प्रशिक्षणों की आड़ में 20 लाख का गबन।
  • राष्ट्रीय कराते प्रतियोगिता की आड़ में 17 लाख रूपए मनमाने तरीके से खर्च करना।
  • कटनी के एक बाबू का कार्यालय में संलग्नीकरण किया गया जो नियम विरूद्व था।
  • प्राचार्यों से लाखों रूपयों वसूलने का आरोप।
  • संयुक्त संचालक ने चार दिवस के मोगलीउत्सव में अपने परिवार को घुमाया जिसमें जो राशि खर्च हुई वह शासन की थी।