नकली रेमेडिसिवर इंजेक्शन मामलें में एसआईटी ने की चार्जशीट पेश, मोखा और उसकी पत्नी सहित 11 आरोपी

जबलपुर ,संदीप कुमार। नकली रेमेडिसिवर इंजेक्शन मामले में जबलपुर एसआईटी ने आखिर 90 दिनों के बाद अपनी चार्ज शीट पेश की है, इस चार्जशीट में एसआईटी ने सिटी अस्पताल संचालक सरबजीत सिंह मोखा समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया था। मामले में गैर इरादतन हत्या की धारा 304 भी बढ़ाई गई थी, जबलपुर एसआईटी ने कोरोना संक्रमण के बीच हुई इस आपदा का अवसर उठाने वालों के खिलाफ 1300 पन्नो की चार्जशीट दाखिल कर 190 गवाहों को शामिल किया,साथ ही 7 कार्टून में भरकर 100 से अधिक सामानों की जब्ती माल को कोर्ट के सामने पेश किया, अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त को तय की गई है,जबलपुर एसआईटी की 4 सीट में सिटी अस्पताल संचालक सरबजीत सिंह मोखा और उनके परिजनों को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

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एसआईटी की जांच में सामने आया है कि उनके ही कहने पर नकली रेमडेसीविर इंजेक्शन खरीदे गए और फिर उनके अस्पताल में भर्ती मरीजों को लगवाए गए थे, बाद में इस पूरे मामले का जब खुलासा होने लगा तो सरबजीत सिंह मोखा ने उन इंजेक्शन को नष्ट कराने और पुलिस से बचने के लिए कंप्यूटर बिल में हेरफेर कर नकली प्रमाण पत्र पेश किए थे, जबलपुर एसआईटी ने सरबजीत सिंह मोखा के अलावा उनकी पत्नी जसमीत कौर, बेटा हरकरण सिंह,सिटी अस्पताल में पदस्थ मैनेजर सोनिया खत्री, दवाकर्मी देवेश चौरसिया, इंजेक्शन खरीदने वाले सपन जैन के अलावा इंदौर के एमआर राकेश शर्मा, इंदौर निवासी दलाल सुनील मिश्रा, नकली इंजेक्शन बनाने वाले फार्मा के एमडी कौशल वोरा व पुनीता कौशल को मुख्य आरोपी बनाया है, इसके अलावा इंजेक्शन रैपर तैयार करने वाले गुजरात निवासी नागेश को भी इस कृत्य में शामिल किया गया था। जबलपुर एसआईटी ने नकली रेमडेसीविर इंजेक्शन मामले में धारा 308 भी बढ़ाई है, गुजरात पुलिस ने इंजेक्शन के पाउडर की जब जांच करवाई तो पाया कि इसमें नमक व ग्लूकोज उपयोग किया गया था,बहरहाल एसआईटी के द्वारा चार्जशीट पेश करने के बाद अब सभी की नजरें अगली सुनवाई में डटी हुई