ब्लैक फंगस के इलाज के लिए दायर आवेदन पर सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया जवाब

ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इंदौर से आवेदन दायर किया गया था। जिसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट में पेश जवाब किया है।

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जबलपुर, संदीप कुमार। इंदौर (Indore) की एक समाजसेवी संस्था “शांति मंच” की तरफ से मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में बढ़ती ब्लैक फंगस महामारी (Black fungus epidemic) के खिलाफ आवेदन दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि ब्लैक फंगस (Black fungus) को लेकर राज्य सरकार (state government) के पास जो उपाय और दवा है वह काफी नहीं है। अब सरकार ने इस आवेदन का जवाब हाईकोर्ट में पेश किया है।

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गौरतलब है कि आवेदन में हाई कोर्ट को बताया गया था कि ब्लैक फंगस महामारी प्रदेश में तेजी से फैल रही है। सरकार के पास इंतजाम नाकाफी है। ऐसे में आवेदन में लिखा गया था कि सरकार शासकीय और प्राइवेट अस्पताल में ब्लैक फंगस के उपचार में उपयोग होने वाली दवाईयां और इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करें। समय पर दवाई तथा इंजेक्शन मिलने से मरीजों की जान बच सकें। इसके अलावा प्राइवेट अस्पताल में ब्लैक फंगस के उपचार और सर्जरी के लिए सरकार दर निर्धारित करें। आवेदन में आगे मांग की गई थी कि 15 लाख से कम सलाना आय वाले परिवारों के लिए ब्लैक फंगस का मुफ्त उपचार सुनिश्चित किया जाये। आयुष्मान, बीपीएल और एपीएल कार्डधारियों का उपचार भी मुफ्त में किया जाये। केन्द्र सरकार की जारी गाइडलाइन का पालन प्राइवेट और सरकारी अस्पताल में सुनिश्चित किया जाये। इसके अलावा उपचार में उपयोग होने वाली दवाईयों और इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने आवश्यक कदम उठाये जाये।

सरकार ने पेश किया जवाब
इस आवेदन के बाद सरकार की तरफ से पेश किये गये जवाब में कहा गया कि प्रदेश में ब्लैक फंगस मरीजों की संख्या अभी 1152 है। ब्लैक फंग्स से पीड़ित 114 मरीज ठीक हो गये हैं। प्रदेश में अभी तक 48 मरीजों की मौत हो गयी है। सरकार के पास उपचार के लिए इस्तेमाल में आने 14 हजार इंजेक्शन उपलब्ध है। इंजेक्शन की उपलब्धता के लिए केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखा गया है। प्रदेश के साथ पूरे देश में ब्लैक फंगस का प्रकोप बढ़ने के कारण संबधित कंपनी मांग के मुताबिक इंजेक्शन उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। इसलिए ओरल ड्रग खरीदी जा रही है। वहीं वैक्सीन की कमी संबंधी मामले में सरकार की ओर से कहा गया था कि 18 से 44 वर्ष के लोगों के वैक्सीनेशन के लिये उन्होंने मैन्यूफेक्चरिंग कंपनियों को ऑर्डर दिया है। जिससे हमें 5.17 करोड़ वैक्सीन उपलब्ध होगी। इसके अलावा एक करोड़ वैक्सीन के लिये ग्लोबल टेंडर जारी किये जायेंगे। इस संबंध में न्यायालय ने आगामी सुनवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किये हैं।

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