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खंडवा : वनमंत्री विजय शाह कोर्ट में हुए पेश, जानें क्या है पूरा मामला

Written by:Amit Sengar
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खंडवा, सुशील विधाणी। खंडवा जिला कोर्ट में आज नेताओं के बीच सरगर्मी देखने को मिली पुराने विवाद में भाजपा और कांग्रेस नेता शुक्रवार दोपहर खंडवा कोर्ट में पेश हुए बताया यह जा रहा है की 2019 के लोकसभा चुनाव में बैतूल सीट की हरसूद विधानसभा पर मतदान के दौरान कांग्रेस नेता बसंत पंवार से विवाद हो गया था, तब दोनों पक्षों ने थाने में जाकर एक-दूसरे पर केस दर्ज कराया था आज न्यायालय में एक आम फरियादी के तौर पर मंत्री शाह विशेष न्यायालय में पेश हुए।

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यह है पूरा मामला
लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान का दूसरा चरण 6 मई 2019 को मप्र में हुआ। बैतूल लोकसभा क्षेत्र के हरसूद विधानसभा स्थित आशापुर मतदान केंद्र 148 पर स्थानीय भाजपा विधायक (अब वनमंत्री) विजय शाह का कांग्रेस के स्थानीय नेता बसंत पंवार व उनके बेटे से जमकर विवाद हो गया। शाह पत्नी भावना के साथ जब वोट डालने पहुंचे तो पोलिंग बूथ के बाहर उन्हें बसंत मिले। दोनों में बातचीत के बाद शाह ने बसंत से कहा- तुम मेरी संपत्ति की जांच कराओ या कुछ और भी कर लो, लेकिन हरसूद में भाजपा ही जीतेगी।

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इस पर बसंत के बेटे लल्लू ने विरोध जताया तो दोनों में सड़क पर ही विवाद हो गया। इसके बाद कांग्रेस समर्थक बसंत व लल्लू ने शाह पर धारा 294, 323, 506 में केस दर्ज कराया था। वही कांग्रेस नेता बसंत ने शाह की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी की थी। एक घंटे बाद शाह के समर्थक थाने पहुंचे और उन्होंने बसंत व लल्लू के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज कराया था।

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कोर्ट पेशी पर आए कांग्रेस नेता बसंत पंवार ने कहा, लोकसभा चुनाव में आशापुर मतदान केंद्र पर वह वोट डालने जा रहे थे। तभी वहां विजयशाह और उनकी पत्नी भी वोट डालने आए। मैंने झुककर उन्हें नमस्कार किया, इस पर उन्होंने ने चिल्लाना, डांटना और इसके बाद गालियां देने शुरु कर दी। मैंने रिपोर्ट लिखाई थी लेकिन भाजपा सरकार में मंत्री जी का कुछ नहीं हो सका। जबकि एट्रोसिटी के मामले में मुझे 2 दिन जेल में रहना पड़ा। वनमंत्री विजयशाह ने कहा कि, लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विवाद किया था। मुझे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। आज कोर्ट में पेशी थी, बयान देने आया हूं।

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लेखक के बारे में
मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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