शिवराज की कोशिशों पर पानी फेरता सरकारी महकमा, आरटीओ में उमड़ी भीड़

मुरैना, नितेंद्र शर्मा। वैश्विक महामारी के दूसरे चरण पर जब लंबे समय तक लगे लॉकडाउन के बाद थोड़ा सुधार आने लगा है। राज्य और केंद्र सरकार की कई सरकारी योजनाओं के द्वारा लोगों को आर्थिक मदद करने की कोशिश की जा रही है, ऐसे में कई आवश्यक सेवाओं वाले सरकारी महकमे ऐसे भी हैं जो कि राज सरकार और मुख्यमंत्री के प्रयासों को विफल करने में जुटे हुए हैं।

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ऐसा ही मामला हमारे सामने आया जो वाकई चौकाने वाला है। जिले की क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के बारे में यह में सूचना प्राप्त हुई कि वहां लॉकडाउन के बाद लर्निंग और परमानेंट लाइसेंस बनाने शुरू कर दिए गए हैं। जब एमपी ब्रेकिंग टीम ने वहां जाकर देखा तो वहां की तस्वीरें वाकई चौकाने व भयभीत करने वाली थी। 200 से 250 लोगों की भीड़ एक दूसरे पर चढ़ी हुई थी मानो कि मौका मिलते ही सामने वाले को हटाकर अपने कार्य को अंजाम दे देंगे।

शिवराज की कोशिशों पर पानी फेरता सरकारी महकमा, आरटीओ में उमड़ी भीड़

जब हम अंदर गए तो जांच पड़ताल करने पर पता चला कि कोविड 19 गाइडलाइन की धज्जियां लोगों द्वारा ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा भी उड़ाई जा रही है। यहां न तो किसी ने मास्क लगाया था, न ही सैनेटाइजर का उपयोग हो रहा था और सोशल डिस्टेंस तो दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा था। यहां पूछने पर मालूम पड़ा RTO साहिबा गायब हैं। लोगों का कहना था कि मैडम तो ऑफिस आती ही नहीं है, पूरा ऑफिस कुछ बाबू और प्राइवेट लोगों पर चलाया जाता है। दूसरी तरफ सरकार ने जिस कंपनी को (smart chip private limited) Computer digitalization का कॉन्ट्रेक्ट दे रखा है उनके द्वारा भी गाइड लाइन का पालन नहीं हो रहा है।

कंप्यूटर कक्ष के सुपरवाइजर धीरज शर्मा तो आरटीओ मैडम से भी ऊपर निकले। वह आपने कर्मचारियों को फोन पर ही दिशा निर्देश देते हैं और ऑफिस से गायब रहते हैं। इस बारे में जब हमने डीएम बी. कार्तिकेय से बात की तो उन्होंने कैमरे पर बोलने से मना कर दिया और अपना पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि ए़डीएम से बात कीजिए। यहां सब अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन यदि इस भीड में एक या दो व्यक्ति भी कोरोना पॉजिटिव हुए तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति क्या हो जाएगी।