मुरैना, संजय दीक्षित। जब कोरोना संक्रमण (Covid-19) ने मुरैना जिले में भयावह रूप धारण कर लिया था। जिससे कोरोना से मौतों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही थी। इसी दौरान इंजेक्शन में जहर की अफवाहों का चलते जिला अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या भी घटती गई। जिला अस्पताल में हर रोज औसतन 32-35 महिलाओं का प्रसव होता, लेकिन अप्रैल महीने के दूसरे सप्ताह के बाद किसी दिन 10 तो किसी दिन 12 महिलाएं प्रसव के लिए आईं थी।

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प्रसूता की कमी की वजह मेटरनिटी वार्ड के कर्मचारियों ने बताया है कि इन दिनों गांवों में अफवाह फैला दी है कि जिला अस्पताल में गर्भवतियों को जहर के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। इन इंजेक्शनों से कभी प्रसूता या फिर कोख में पलने वाले बच्चे की मौत हो जाती है। इसके अलावा प्रसूता के साथ जाने वाले परिजन को कोरोना वार्ड में भर्ती करवा दिया जाता है। यह अफवाह फैलाने वालों में कई आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताएं शामिल हैं। जो ग्रामीण इलाकों में नहीं, बल्कि जिला अस्पताल में भी प्रसूता या उनके स्वजनों को जहर के इंजेक्शन की अफवाह से ऐसा डरा जाती हैं कि जिला अस्पताल की बजाय प्रसूता सीधे प्राइवेट अस्पताल का रुख करती हैं।

आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ता फैला रही अफवाह

ग्रामीण इलाकों में अफवाह बड़ी तेजी से फैलाई जा रही है कि जिला अस्पताल में जा रहीं गर्भवतियों को जहर के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। यह अफवाह कुछ आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं द्वारा फैलाई रही हैं, जो जिला अस्पताल की बजाय निजी अस्पतालों में प्रसूताओं को भेजकर हजारों रुपये का कमीशन कमा लेती हैं। इस समय जिला अस्पताल से ज्यादा प्राइवेट नर्सिंग होम में प्रसूताएं भर्ती हो रही हैं और उनकी डिलेवरी प्राइवेट नर्सिंग होम में कराई जा रही है। जिला अस्पताल में प्रसूताओं को जहर के इंजेक्शन दिए जाने की अफवाह के कारण प्राइवेट अस्पतालों की चांदी हो गई है। प्राइवेट अस्पतालों में प्रसव का आंकड़ा दो गुना तक बढ़ गया है। वहीं दर्जनों की संख्या में ऐसी भी गरीब प्रसूताएं हैं जो प्राइवेट अस्पताल का खर्च नहीं उठा सकतीं, इसलिए प्रसव घर पर ही करवा रही हैं।

जहर के इंजेक्शन सुन अस्पताल के कर्मचारी हैरान

एक प्रसूता मेटरनिटी वार्ड में आई, उसने बिना जहर के इंजेक्शन दिए प्रसव कराने की गुहार लगाई तो, यह बात सुनकर मेटरनिटी वार्ड की नर्सें दंग रह गईं। मेटरनिटी वार्ड की प्रभारी ने बताया कि इस समय जिला अस्पताल की प्रसूताओं की स्थिति ये है कि बहुत ही कम प्रसूता डर की वजह से जिला अस्पताल में है आ रही है। हालांकि उन्होंने बताया कि समय-समय पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर जिला अस्पताल में कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस समय कोरोना की वजह से मुंह बांधकर आती है तो पता नहीं चलता है कि आशा है या फिर परिजन। ग्रामीणों की माने तो पूरे ग्रामीण क्षेत्र में यह अफवाह फैलाई जा रही है क्या जिला अस्पताल में जहर का इंजेक्शन लगाया जाता है। जिससे जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो जाती है और परिजनों को कोविड-19 वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है। इस अफवाह की वजह से प्रसूताओं ने जिला अस्पताल में प्रसव कराना बन्द कर दिया है।इस कारण प्राइवेट नर्सिंग होम कोरोना में प्रसव महिलाओं से लूट खसोट करने में लगे हुए है।