शिवलोक की अनुभूति का क्षण : जगदीश देवड़ा

श्री महाकाल लोक के लोकार्पण पर सभी श्रद्धालु नागरिकों को पुण्य लाभ हो यही मंगलकामना है।

नीमच, कमलेश सारडा। मध्य प्रदेश (MP) के इतिहास में 11 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक होगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर परिसर में निर्मित महाकाल लोक (Mahakal Lok) का लोकार्पण करने पधार रहे हैं। विश्व के विभिन्न देशों में रह रहे महाकाल के भक्तों के लिए भी विशेष दिन है। महाकाल मंदिर परिसर का वैभव अब अनूठे रूप में निखरेगा। उज्जैन की भूमि सहित पूरा प्रदेश शिवमय हो जाएगा। यह एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक घटना होगी। महाकाल मंदिर के भव्य परिसर में दिव्य क्षणों की उपस्थिति होगी महाकाल के असंख्य श्रद्धालुओं की अपेक्षा पूरी होगी।

देश विदेश में रह रहे महाकाल के सभी भक्त इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे। यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी शिवालयों में विशेष व्यवस्थाएं की गई है। मंदिर परिसर की भव्यता को नया रूप देने और इसे निखारने में मुख्यमंत्री जी ने अथक परिश्रम किया है। श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान रखा है। प्रथम चरण की इस परियोजना को समय पर पूरा करने में न तो धनराशि की कमी होने दी और न ही गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी होने दी। निरंतर समीक्षा से समय पर निर्माण सम्पन्न हुआ। दूसरे चरण की कार्ययोजना पर भी काम जल्दी शुरू हो जाएगा। इस पुण्य कार्य से जुड़े सभी लोग बधाई के पात्र हैं। भगवान महाकाल के आशीर्वाद, सबकी मेहनत और लगन और प्रतिबद्ध प्रयासों से यह काम सफल हुआ है। लाखों श्रद्धालुओं की ओर से सबको बधाई।

 

मुख्यमंत्री की परिकल्पना

Mahakal Lok

श्री महाकाल लोक की परिकल्पना यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की है। उन्होंने सिंहस्थ के समय से ही मंदिर परिसर का विस्तार कर इसे भव्य रुप देने का संकल्प लिया था। लाखों श्रद्धालुओं की भी यही अपेक्षा थी। वर्ष 2019 से शुरू हुए निर्माण कार्यों को पूरा करने में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धनराशि में कमी नहीं आने दी। संत समुदाय के प्रतिनिधियों से चर्चा की और विभिन्न स्तरों के कार्यों की निरंतर समीक्षा की। अब पूरे मंदिर परिसर की भव्यता कई गुना बढ गई है। महाकाल मन्दिर में आने वाले भक्त दर्शन के बाद शिवलोक की अनुभूति कर सकेंगे। रूद्र सागर के सौंदर्यीकरण, हॉकर्स जोन विकसित करने, रूद्र सागर के पश्चिमी मार्ग का विस्तार को परियोजना में शामिल किया। श्रद्धालुओं का अनुभव और ज्यादा आनंददायी होना चाहिए। इसके लिये वास्तु पर विशेष ध्यान दिया गया है। सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं का ध्यान रखा गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मंदिरों के जीर्णोद्धार और उनकी भव्यता को निखारने के कामों की एक श्रृंखला चल पड़ी है। भारत में यह काम अधूरा पड़ा था। महाकाल की नगरी उज्जैन की महिमा सर्वविदित है। इसकी गणना वेदों की नगरी के रूप में भी होती है। प्राचीन वैदिक परम्परा मे तत्त्वों की पूजा की जाती थी। खास तौर पर वायु, अग्नि, सूर्य के साथ-साथ जल की उपासना का उल्लेख शास्त्रों में है। पुराणिक उल्लेख यही कहता है कि उज्जैन में शिप्रा स्नान पापों को नष्ट कर मोक्ष प्रदान करता है। क्षिप्रा नदी को मोक्ष दायिनी कहा गया है। उज्जैन  शहर अपने आप में अद्भुत है। उज्जैन ग्रीनविच की तरह ही प्राचीन कालगणना का केंद्र था। यहां से होकर कर्करेखा निकलती है। ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से उज्जैन का पूरे विश्व में विशेष स्थान है। महाकाल की नगरी में उपस्थित होना ही अपने आप में पुण्य का काम है। श्री महाकाल लोक के लोकार्पण पर सभी श्रद्धालु नागरिकों को पुण्य लाभ हो यही मंगलकामना है।