शिवपुरी: 7 बच्चों की हालत बिगड़ी, 4 की मौत, मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम, जाँच जारी

आनन फानन में परिजन मासूमों को लेकर कोलारस स्वास्थ्य केन्द्र पहुचे। जहां से डॉक्टरों ने जांच के बाद जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया। कोलारस के वैरसिया गांव की आदिवासी कॉलोनी में सात बच्चों को उल्टियां के चलते हालत बिगड़ गई।

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शिवपुरी, शिवम पाण्डेय। जिले के कोलारस से दिल दहलाने वाली खबर सामने आ रही है। जहाँ पर खबर जिले के कोलारस अनुविभाग के बैरसिया कॉलोनी से आ रही है। जहां पिछले 24 घंटे में एक के बाद एक तीन बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई है। इतना ही अभी गांव में ही तीन मच्चों की हालात और खराब है। इस मामले की सूचना जैसे ही प्रशासन को मिली। वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और बच्चों के कोविड के सेम्पल लिए।

जानकारी के अनुसार बीते दिनों दोपहर में गांव में फैरीबाला युवक तरबूज बेचने आया था। जिसे आदिवासी बाहुल्य गांव के बच्चों ने खरीद लिया। बच्चों ने खरीदकर जैसे ही यह तरबूज खाया बच्चों की तबियत बिगडने लगी। बच्चों को उल्टी दस्त के साथ साथ सांस लेने में तकलीफ होने लगी। आनन फानन में परिजन मासूमों को लेकर कोलारस स्वास्थ्य केन्द्र पहुचे। जहां से डॉक्टरों ने जांच के बाद जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया। कोलारस के वैरसिया गांव की आदिवासी कॉलोनी में सात बच्चों को उल्टियां के चलते हालत बिगड़ गई। तीन दिन में चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि तीन बच्चे बीमार हो गए। मौत की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी है। हालांकि बताया जा रहा है कि बच्चों ने फेरी वाले से तरबूज खा लिया था।

जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। वैरसिया गांव में नीलम (13) पुत्र हल्के आदिवासी व रामबाई आदिवासी, चमेली (10) पुत्री शिवचरण, प्रियंका आदिवासी (5) पुत्री सुखदेव आदिवासी और वंदना आदिवासी (2.6) पुत्र तोफन आदिवासी की मौत हो गई है। नीलम आदिवासी हर दिन की तरह 29 अप्रैल को बकरियां चराकर लौटा और सो गया। सुबह उल्टियां हुई तो परिजन कोलारस अस्पताल लाए। कोलारस से शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर किया।

जिला अस्पताल से ग्वालियर ले जाते समय मोहना के पास दम तोड़ दिया। उसी दिन चमेली की मौत हो गई। 1 मई को प्रियंका आदिवासी और 2 मई को वंदना ने दम तोड़ दिया7 सूचना के बाद कोलारस से मेडिकल टीम गांव जा रही है। यहां दूसरे बच्चों का भी परीक्षण किया।

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ढाई साल की वंदना आदिवासी ने मेडिकल टीम के सामने ही दम तोड़ा था। इसके अलावा तीन अन्य बच्चे राखी आदिवासी (3), सागर आदिवासी (5) और करनू आदिवासी (1.6) को कोलारस अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के बाद ठीक हो गए और घर भेज दिया था। मेडिकल टीम ने मृतक व बीमार बच्चों का आरटी पीसीआर टेस्ट कराया है।

बच्चों ने क्या खाया, परिजन नहीं बता पा रहे

मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर मृतक व बीमार बच्चों के परिजनों से बातचीत की है। लेकिन परिजन स्पष्ट कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। बच्चों ने ऐसा क्या खाया कि जिससे उनकी हालत बिगड़ी। पहले दिन नीलम के मुंह से झाग भी आया था। जिससे मौत की वजह कहीं ना कहीं विषाक्त भोजन खाने ही माना जा रहा है।

एक गांव में तीन मासूमों की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट हुआ और पूरी टीम गांव में पहुंची। कोरोना के कहर के बीच प्रशासन ने इस गांव में लोगों के सेम्पल लिए है। जिन्हें खांसी जुखाम बुखार है। परंतु अभी भी यह रहस्य बना हुआ है कि आखिर इन मासूमों की मौत का कारण तरबूज है यह समझ से परे है। अब इस गांव की सभी सींमाओं को सील कर दिया है।