MP उपचुनाव: विवेक तन्खा ने काउंटिंग प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल, इन क्षेत्रों में पुनर्मतदान की मांग

कई क्षेत्रों में फायरिंग और पथराव की शिकायत दर्ज की गई। वहीं कहीं दबंगों द्वारा ग्रामीणों को वोट देने से रोका गया। ऐसे सूचना के बाद कांग्रेस लगातार इन क्षेत्रों में एक बार फिर निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रही है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) में 28 विधानसभा सीटों (28 assembly seats) पर उपचुनाव (By-election) के लिए मतदान (voting) होने के बाद भी मामला थमा नहीं है। कांग्रेस (congress) एक तरफ जहां लगातार बीजेपी (bjp) पर आरोप लगा रही है। वहीं दूसरी तरफ अधिकारी और कर्मचारियों पर भी निष्पक्षतापूर्ण मतदान नहीं कराए जाने की बात कह रही है। साथ ही कांग्रेस की मांग है कि चंबल के कई विधानसभा सीटों पर मतदान को प्रभावित करने की कोशिश की गई है।

इसलिए इन विधानसभा क्षेत्रों में पुनः मतदान होना चाहिए। अब इस मामले में राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के दिग्गज नेता विवेक तंखा (vivek tankha) ने बड़ी बात कही है। चंबल के विधानसभा सीटों पर पुनर्मतदान की बात करते हुए तंखा ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया है।

दरअसल शुक्रवार को ट्वीट (tweet) करते हुए विवेक तंखा (vivek tankha) ने लिखा कि मध्यप्रदेश उपचुनाव में 28 विधानसभा सीटों पर प्रदेश सरकार द्वारा ट्रांसफर किए गए प्रशासनिक अधिकारियों से पक्षपाती रवैया देखने को मिला। जिसके बाद अब चुनाव आयोग (Election commission) से वोटों की काउंटिंग में निष्पक्षता की उम्मीद रहेगी।

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इसके साथ ही साथ राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता विवेक तंखा ने चुनाव आयोग मांग की है कि चंबल की कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव को प्रभावित किया गया है। ऐसे विधानसभा क्षेत्रों को चिन्हित कर यहां पर पुनर्मतदान कराया जाना चाहिए।

बता दे कि 3 नवंबर को हुए 28 विधानसभा सीटों पर मतदान में कई जगह शांतिपूर्ण मतदान होने से रोका गया। कई क्षेत्रों में फायरिंग और पथराव की शिकायत दर्ज की गई। वहीं कहीं दबंगों द्वारा ग्रामीणों को वोट देने से रोका गया। ऐसे सूचना के बाद कांग्रेस लगातार इन क्षेत्रों में एक बार फिर निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रही है।

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी लगातार कांग्रेस पर हमलावर बनी हुई है। बीजेपी की तरफ से कहना है कि कांग्रेस ने पहले ही हार मान ली है। जिसके बाद वह कभी हम पर ईवीएम हैक का आरोप लगा रहे हैं तो कभी विधानसभा उपचुनाव को प्रभावित करवाने का। अब ऐसे में 10 नवंबर को आने वाले परिणाम ही बताएंगे कि जनता शिवराज सरकार को सत्ता में परमानेंट करती है या कमलनाथ की सत्ता में वापसी होती है।

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