कैट की मांग, लॉकडाउन की स्थिति में व्यापारियों को मुआवजा दे सरकार

कैट (CAIT) ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से लॉकडाउन के दौरान व्यापारियों को मुआवजा देने की मांग की है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। देश भर में तेजी से फैल रहे कोरोना के नए स्ट्रेन (Covid-19 Strain) के चलते संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हर रोज चौकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। ऐसे में राज्यों में नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाने की स्थिति बन चुकी है। देश के कई बड़े शहरों में कोरोना के नए स्ट्रेन के खतरे को देखते हुए कोरोना कर्फ्यू (Corona Curfew) लगा दिया गया है। ऐसे में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Union Finance Minister Nirmala Sitharaman) एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेज मांग की है कि संक्रमण से बचाव में यदि कोई राज्य लॉकडाउन की घोषणा करता है, जिससे दुकानें बंद हो, तो सरकार को उन सभी व्यापारियों को उचित मुआवजा देना चाहिए।

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कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि सरकार के आदेश पर किए गए लॉकडाउन के कारण बंद हुई दुकानों को सरकार से मुआवजा लेने का हक बनता है। उन्होंने मुआवजे देने के फॉमूर्ले को बताते हुए कहा कि जिस दुकान की जो वार्षिक टर्न ओवर है उसके अनुपात में सरकार को ऐसे व्यापारियों को मुआवजा देना चाहिए।

नहीं हुई पिछले साल की भरपाई

प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि पिछले वर्ष के लॉकडाउन में व्यापारियों ने न केवल अपनी दुकानें ही बंद कीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर करोना के भीषण समय में भी अपनी जान की परवाह न करते हुए पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को निर्बाध रूप से जारी रखा, जिसके कारण देशभर के व्यापारियों को अपने व्यापार में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हुई है।

वित्तीय संकट में व्यापारी

कैट ने कहा कि जहां केंद्र सरकार ने गत वर्ष विभिन्न वर्गों के लिए अनेक पैकेज दिए, वहीं देश के व्यापारियों को किसी भी पैकेज में एक रुपये की भी सहायता नहीं दी गई और न ही किसी राज्य सरकार ने व्यापारियों की ओर मदद का हाथ बढ़ाया, जिसके फलस्वरूप व्यापारी वर्ग आज तक वित्तीय तरलता के बड़े संकट का सामना कर रहा है।

लॉकडाउन में व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान

कैट के अनुसार, देश में प्रतिवर्ष लगभग 80 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जो प्रति माह लगभग 6.5 लाख करोड़ का होता है। अकेले महाराष्ट्र का मासिक कारोबार लगभग 1 लाख करोड़ रुपये और दिल्ली का मासिक कारोबार लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का होता है। जिससे कि अनुमान लगाया जा सकता है कि लॉकडाउन में व्यापारियों का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।