कितना खतरनाक है शरीर के लिए स्मॉग और कितना अलग होता है यह फॉग से, क्या होता है इसका असर, पढ़ें ख़बर

स्मॉग

Fog vs Smog: दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। नवंबर महीने की शुरु में ही ठंड दस्तक देने लगी है। पूरे एनसीआर में चारों तरफ इस समय धुंध ही धुंध दिखाई दे रहा है। जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान लोगों को जहरीली हवाओं से सांस लेने में आंखों में जलन के साथ कई समस्याएं होने लगी है। ऐसे में लोग इस बात को लेकर कंफ्यूजन हो जाती है कि यह सर्दी के समय चारों तरफ फैला हुआ फॉग है या जहरीली हवाओं और प्रदूषण के कारण चारों तरफ फैला हुआ स्मॉग।

क्या होता है फॉग

फॉग अक्सर सर्दी के समय दिखता है। इसे कोहरा भी कहते हैं। आमतौर पर कड़ाके की सर्दी में कोहरा दिखाई देता है। कोहरे में पानी की बूंदे हवा में ही जम कर सफेद रंग की हो जाती हैं। सर्दियों में यही बूंदे सफेद चादर की तरह नजर आती हैं। इस समय विजबिलिटी काफी कम हो जाती है और जमकर ठंड भी लगने लगती है। बहरहाल ये सेहत के लिए हानिकारक नहीं होती हैं।

क्या होता है स्मॉग

स्मॉग जहरीली हवाओं और प्रदूषण के कारण होता है। इसमें धुआं और प्रदूषण मिक्स होता है। यह फॉग की तरह सफेद नहीं होता है बल्कि यह ग्रे रंग का होता है। इसमें भी विजिबिलिटी कम होती है। इसमें सल्फर डाइ ऑक्साइड और बेंजीन जैसी हानिकारक गैस पाई जाती हैं। जो कि सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होती हैं। स्मॉग की वजह से फेफड़ों में कैंसर, आंखों में जलन और हार्ट संबंधी बीमारी होने का डर रहता है।

स्मॉग से बचाते हैं ये उपाय

  • स्मॉग से बचने के लिए घरों के बाहर एक्सरसाइज नहीं करना चाहिए।
  • स्मॉग से बचने के लिए ज्यादा बिजली और एनर्जी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करना चाहिए।
  • स्मॉग से बचने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग करना चाहिए। साथ ही प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • बाहर से आने वाली हवाओँ को रोकने के लिए घर की खिड़की, दरवाजों को अच्छी तरीके से बंद कर लेना चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता है। इसे अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरुर लें।)


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Shashank Baranwal

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पत्रकारिता उन चुनिंदा पेशों में से है जो समाज को सार्थक रूप देने में सक्षम है। पत्रकार जितना ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होगा पत्रकारिता उतनी ही ज्यादा प्रखर और प्रभावकारी होगी। पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम मज़लूमों, शोषितों या वो लोग जो हाशिये पर है उनकी आवाज आसानी से उठा सकते हैं। पत्रकार समाज मे उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना एक साहित्यकार, समाज विचारक। ये तीनों ही पुराने पूर्वाग्रह को तोड़ते हैं और अवचेतन समाज में चेतना जागृत करने का काम करते हैं। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अपने इस शेर में बहुत सही तरीके से पत्रकारिता की भूमिका की बात कही है– खींचो न कमानों को न तलवार निकालो जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो मैं भी एक कलम का सिपाही हूँ और पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे साहित्य में भी रुचि है । मैं एक समतामूलक समाज बनाने के लिये तत्पर हूँ।

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