TMC में शामिल होते ही बढ़ी मुकुल रॉय की मुश्किलें, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में BJP

इसके बाद ममता ने बड़ा दांव खेलते हुए मुकुल रॉय को लोक लेखा समिति (पीएसी) का नया अध्यक्ष बना दिया

मुकुल रॉय

कोलकता, डेस्क रिपोर्ट। एक तरफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 (west bengal assembly election 2021) के बाद से राज्य में सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। वही हाल ही में बीजेपी से टीएमसी में शामिल होने वाले  मुकुल रॉय (Mukul Roy)की मुश्किलें बढ़ गई है।बीजेपी ने विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी के समक्ष मुकुल रॉय को बीजेपी विधायक के रूप में अयोग्य ठहराए जाने की मांग की है। वही इस मामले को लेकर बीजेपी कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court)  जाने की तैयारी में है।

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दरअसल, विधानसभा चुनाव में मुकुल रॉय ने बीजेपी से विधायक का चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी, लेकिन चुनाव के कुछ दिनों बाद ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में टीएमसी में घर वापसी कर ली।इसके बाद ममता ने बड़ा दांव खेलते हुए मुकुल रॉय को लोक लेखा समिति (PSC) का नया अध्यक्ष बना दिया, जिससे भाजपा भड़क गई और इसी के विरोध में 8 बीजेपी विधायकों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा (West Bengal Assembly) की स्ठाई समितियों से इस्तीफा दे दिया।

इतना ही नही मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुकुल रॉय को लोक लेखा समिति (पीएसी) का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने को लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की थी और नियुक्ति में नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए हस्तक्षेप का अनुरोध किया।उनका कहना था कि BJP के टिकट पर विधायक चुने गए मुकुल रॉय TMC में शामिल होने के बाद बीजेपी के सदस्य नहीं रह गए हैं और उन्हें PSC अध्यक्ष बनाया जाना तय नियमों का उल्लंघन है क्योंकि इस पद पर विपक्षी दल के किसी नेता को नियुक्त किया जाता है।

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इसके अलावा भाजपा ने पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल में शामिल होने को लेकर उन्हें अयोग्य करार देने की मांग की थी, जिसको लेकर आज बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी (Bengal Assembly Speaker Biman Banerjee) के समक्ष दायर शिकायत पर सुनवाई हुई और अब अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। इधर इस मामले को लेकर बीजेपी कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है, ऐसे में मुकुल रॉय की मुश्किलें बढ़ गई है। अब देखना दिलचस्प होगी कि मुकुल रॉय अपनी विधायक और अध्यक्ष पद बचाने में कामयाब होते है या नहीं।