विश्व दिव्यांग दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों से की ये अपील, पढ़ें पूरी खबर

Atul Saxena
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World Disabled Day 2022 : विश्व दिव्यांग दिवस या विश्व विकलांग दिवस को अंग्रेजी में International Day of Persons with Disabilities भी कहा जाता है, आज 3 दिसंबर 2022 को पूरा विश्व इसे मना रहा है और दिव्यांग जनों के सहयोग और उनको प्रोत्साहित करने की बात कह रहा है।

भारत में भी आज विश्व दिव्यांग दिवस पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये गए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में दिव्यांग जनों के सशक्तिकरण के लिए 2021 और 2022 के राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किये ।

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विश्व दिव्यांग दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों से की ये अपील, पढ़ें पूरी खबर

राष्ट्रपति ने उपस्थित दिव्यांगजनों और अन्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज विश्व में 100 करोड़ लोग किसी ने किसी रूप में दिव्यांग है भारत में भी एक बड़ी संख्या दिव्यांगजनों की है, आज उनके सशक्तिकरण के लिए विश्व सामने आ रहा है ।

विश्व दिव्यांग दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों से की ये अपील, पढ़ें पूरी खबर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने कहा कि यह सुनिश्चित करना हम सबका, पूरे समाज का दायित्व बनता है कि सभी दिव्यांगजन स्वतंत्र रूप से एक गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें। उन्हें अच्छी शिक्षा, अच्छा वातावरण मिल सके, उन्हें अपने फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता हो।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परम्परा में disability को ज्ञान-अर्जन और उत्कृष्टता प्राप्त करने में कभी भी बाधा नहीं माना गया है। ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जिसमें हमारे दिव्यांग भाइयों-बहनों ने अपने साहस, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर अनेक क्षेत्रों में प्रभावशाली उपलब्धियां हासिल की हैं।

पर्याप्त अवसर और सही वातावरण मिलने पर, दिव्यांगजन भी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। Tokyo Paralympics में हमारे Para Olympians ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके इतिहास रचा और भारत का गौरव बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, दिव्यांगजनों सहित, प्रत्येक व्यक्ति के सशक्तिकरण की कुंजी है। मेरा मानना है कि शिक्षा में भाषा सम्बन्धी कठिनाइयों को दूर करने के लिए तथा दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा को और सुलभ बनाने के लिए, हमें टेक्नोलॉजी का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।

मैं औद्योगिक समूहों, निजी संस्थाओं और सिविल सोसाइटी से आग्रह करती हूं कि वे अपने संस्थाओं में बुनियादी ढांचे को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने के प्रयास करें और उनके सशक्तिकरण का प्रयास करें। मैं समाज के सभी वर्गों से अपील करती हूं कि वो दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

 

 


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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ....पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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