27 सालों बाद सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी अंगारकी चतुर्थी, होंगे ये लाभ

10 जनवरी को साल की सबसे बड़ी चतुर्थी सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाने वाली है। मंगलवार का दिन होने से इसे अंगारकी चतुर्थी (Angarki Chaturthi) कहा जाएगा।

Sankashti Chaturthi: माघ मास में कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी या फिर संकटा चौथ के नाम से जाना जाता है। 10 जनवरी को यह चतुर्थी आने वाली है और मंगलवार का दिन होने की वजह से इसे अंगारकी चतुर्थी (Angarki Chaturthi) कहा जाएगा। साल भर में जितनी भी चतुर्थी पड़ती है उसमें ये चतुर्थी सबसे बड़ी मानी जाती है। खास बात तो यह है कि इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में चतुर्थी मनाई जाने वाली है, जो मनवांछित फल प्रदान करने वाली होगी।

सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण

अंगारकी चतुर्थी के दिन अश्लेषा नक्षत्र होने के चलते सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। ऐसे में वह जातक जिनके विवाह में कोई बाधा आ रही है वो इस दिन अगर कोई उपाय अपनाएं तो गणपति जी और माता चौथ की कृपा से सारी विघ्न बाधाएं दूर हो जाती है। साल में कुल 24 चतुर्थी होती है जिसमें से माघ मास में आने वाली चतुर्थी को बड़ा माना जाता है इसलिए इस दिन महिलाएं व्रत भी रखती हैं।

मंगलनाथ में उमड़ेगी आस्था

माघ मास कि यह चतुर्थी मंगलवार के दिन होने से अंगारकी कहलाएगी। यही वजह है कि उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर (Mangalnath Temple) में इस दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने वाली है। भगवान मंगलनाथ के दरबार में शादी विवाह ना होने से परेशान जातक भात पूजा करवाने के लिए पहुंचते हैं। शिप्रा तट पर स्थित श्री अंगारेश्वर मंदिर में भी पूजन अर्चन का विधान है। अंगारकी चतुर्थी होने की वजह से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा देखने को मिलेगी। इसके अलावा चिंतामन गणेश, मंछामन गणेश, सिद्धिविनायक गणेश मंदिर सहित अन्य गणपति मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ी हुई देखी जाएगी।

Angarki Chaturthi

वर्षों बाद बना है शुभ संयोग

अश्लेषा नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में मंगलवार के दिन चतुर्थी का अंगारकी होना प्रबल योग बना रहा है। अतिथियों के मुताबिक नक्षत्र गणना के आधार पर 27 सालों में यह योग बनता है। यही वजह है कि इस दिन विशेष व्रत और अनुष्ठान करने का महत्व माना जाता है।