अगर आपके भी घर में है श्रीमद्भागवत गीता, तो इन नियमों का करें पालन, वरना जीवन में आ सकता है संकट

भावना चौबे
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श्रीमद्भागवत गीता हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथो में से एक है। यह महाभारत के भीष्म पर्व में स्थित है श्रीमद्भागवत को गीता, गोपीगीता, विष्णुगीता और ईश्वरगीता भी कहा जाता है। यह ग्रंथ अष्टादश अध्यायों और 7 सौ श्लोकों की रचना है। हिंदू धर्म में गीता का विशेष महत्व है। अधिकतर घरों में श्रीमद् भागवत गीता पाई जाती है। भगवत गीता को पूजा घर में रखा जाता है। लेकिन इससे जुड़े कई नियम है। जिनके बारे में सभी को पता नहीं होता है। इसलिए आज हम आपको इस लेख के द्वारा गीता से जुड़े कुछ नियम बताने जा रहे हैं जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।

घर में क्यों रखना चाहिए गीता

हिंदू धर्म में श्रीमद् भागवत गीता को सभी ग्रंथों में से सबसे पवित्र ग्रंथ माना जाता है। इस पवित्र ग्रंथ को घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है साथ ही साथ घर में खुशहाली बनी रहती है। सिर्फ ग्रंथ को घर में रखना ही काफी नहीं है। रोजाना गीता का पाठ भी करना चाहिए। ऐसा करने से परिवार में एकता सुख-समृद्धि बनी रहती है। गीता में वह अद्भुत रहस्य छुपे हैं, जो कहीं और नहीं मिल सकते। गीता में सफलता का मार्गदर्शन दिया गया है। इसलिए इसका पाठ करने से व्यक्ति को हर मोड़ पर सफलता मिलती है और तरक्की के मार्ग खुलते हैं।

श्रीमद् भागवत गीता से जुड़े किन नियमों का पालन करना चाहिए

1. श्रीमद् भागवत गीता को हमेशा साफ और स्वच्छ जगह पर ही रखना चाहिए। इसे पवित्र ग्रंथ माना जाता है। इसलिए इसके आसपास साफ सफाई रखना बहुत जरूरी है। मासिक धर्म के दौरान गीता को हाथ ना लगाएं।

2. श्रीमद् भागवत गीता का पाठ करने के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कभी भी गीता को जमीन पर ना रखें। हमेशा इसे अपने हाथों में लेकर पढ़े या फिर श्रीमद् भागवत गीता की एक लकड़ी की चौकी या काठ आता है उस पर रखकर पढ़े। गीता को जमीन पर रखने से उनका अपमान होता है।

3. गीता का पाठ हमेशा नहाने के बाद और साफ-स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद ही करना चाहिए। ऐसा करने से सद्बुद्धि मिलती है।

4. इस बात का विशेष ध्यान रखें। श्रीमद् भागवत गीता को हमेशा लाल रंग की वस्त्र में लपेट कर रखें।

5. श्रीमद् भागवत गीता का पाठ करने का कोई विशेष समय नहीं बताया गया है। इसे किसी भी समय किया जा सकता है। परंतु जब भी पाठ करें साफ-सफाई का ख्याल रखें और बिना नहाए ना करें।

(Disclaimer- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं के आधार पर बताई गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।)


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भावना चौबे

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इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं। मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

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