Puja Path Niyam: पूजा के दौरान करें आसन से जुड़े इन नियमों का पालन, देवी-देवता होंगे प्रसन्न, मिलेगा शुभ फल

पूजा आसन से जुड़े कुछ नियमों का पालन शुभ माना जाता है। यदि इन बातों का ध्यान न रखा जाए तो पूजा का फल नहीं मिलता।

Manisha Kumari Pandey
Published on -
puja path niyam

Puja Path Niyam: हिन्दू धर्म में जमीन पर बैठ कर पूजा करना उचित नहीं माना जाता है। ऐसे में आसन पूजा-पाठ का अहम हिस्सा बन जाता है। लेकिन क्या आपको पता है पूजा के दौरान आसन से संबंधित कुछ नियमों का बेहद जरूरी होता है। ऐसा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और पूजा का फल मिलता है।

कैसा होना चाहिए आसन का कपड़ा और रंग?

पूजा के दौरान कुषा आसन का इस्तेमाल कर शुभ माना जाता है। आप ऊन और कंबल के आसान का उपयोग भी कर सकते हैं। ध्यान रखें कि आसन का रंग काला या नीला नहीं होना चाहिए। लाल और नारंगी रंग शुभ रहेगा ।

जरूर करें इन नियमों का पालन 

  • पूजा समाप्त होने के बाद आसन से सीधा उठ जाना शुभ नहीं माना जाता है। आचमन करके थोड़ा जल अर्पित करने के बाद आसन को छोड़ना चाहिए।
  • आसन को कभी भी गंदे हाथों में नहीं छूना चाहिए हैं। इसके अशुद्ध होने पर पूजा का फल नहीं मिलता।
  • पूजा खत्म होते ही आसन को मोड़कर स्वच्छ स्थान पर रख दें। इसे इधर उधर न पटकें।
  • आसन छोड़ने से पहले धरती माँ को प्रणाम करें। देवी-देवताओं को भी स्मरण करें।

भूलकर भी न करें ये गलती 

कई लोग पूजा आसन के रूप में दरी, चटाई, पटरी इत्यादि का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता। पत्थर के आसन पर बैठकर पूजा करने से दरिद्रता आती है। आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। लकड़ी, पत्तों और बांस पर बैठ भी पूजा करना शुभ नहीं माना जाता।

(Disclaimer: इस आलेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है, जो पंचांग, ग्रंथों, मान्यताओं और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। MP Breaking News इन बातों के सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं करता।)


About Author
Manisha Kumari Pandey

Manisha Kumari Pandey

पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।"

Other Latest News