आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। धूमधाम से पूरा देश अब नवरात्रि के रंग में रंग जाएगा। हालांकि, इस बार नवरात्रि 8 दिनों की रहेगी, तृतीया तिथि के घटने से ऐसा होगा। यानी आज से शुरू होने वाली नवरात्रि 6 अप्रैल को रामनवमी के शुभ अवसर पर समाप्त होगी। इसके साथ ही हिंदू नव वर्ष की भी शुरुआत हो गई है। यह साल की पहली नवरात्रि होगी, जिसे भक्त धूमधाम से मनाते हैं क्योंकि आज से नया साल भी शुरू हो जाता है।
नवरात्रि के प्रथम दिन भक्त घटस्थापना करते हैं और नौ दिनों तक देवी की पूजा करते हैं। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं और देवी की आराधना करते हैं। 9 दिनों में अलग-अलग देवी की पूजा की जाती है, और सभी का अलग-अलग महत्व होता है।

घटस्थापना के मुहूर्त पर नजर डालें
घटस्थापना के मुहूर्त पर नजर डालें तो आज का दिन बेहद शुभ है। सुबह 6:15 से 10:20 तक घटस्थापना का मुहूर्त रहेगा। इसके बाद आप दोपहर 12:00 से 12:50 तक भी घटस्थापना कर सकते हैं। इसके लिए आपको जहां घटस्थापना करनी है, उस स्थान को अच्छे से साफ करना होगा। फिर पटिया पर एक मुट्ठी अनाज रखकर उस पर मिट्टी का कलश पानी से भरकर रखें। इस कलश को आम या फिर अशोक के पत्तों के साथ ढक दें और गणेश जी को प्रणाम करके कलश स्थापित करें। ध्यान रखें कि चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और कलश में शुद्ध पानी व गंगाजल मिलाएं। कलश स्थापना करते समय “ॐ नमः चंडिकाय” मंत्र बोलें।
कलश स्थापना का वैज्ञानिक महत्व
कलश स्थापना का न सिर्फ धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। घटस्थापना में मिट्टी के कलश का उपयोग किया जाता है, जो पृथ्वी तत्व का प्रतीक होता है। इसमें वायु और जल तत्व शामिल होते हैं और इसके निकट ही अग्नि तत्व भी रहता है। कलश स्थापना के समय कलश आकाश तत्व यानी ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल में सभी देवी-देवताओं का निवास होता है और जल से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। ऐसे में जब कलश स्थापना की जाती है, तो जल में शक्ति का आह्वान होता है। इसे समझा जा सकता है कि घटस्थापना का महत्व न सिर्फ धार्मिक है, बल्कि यह वैज्ञानिक और सैद्धांतिक भी है।
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