आंदोलनों के जरिए दिग्गजों का शक्ति प्रदर्शन, 'पॉवर सेंटरों' में बंटी भाजपा

भोपाल। प्रदेश में सत्ता से बेदखल होने के बाद मप्र भाजपा में अंदरूनी तौर पर चली आ रही गुटबाजी अब सड़क पर दिखाई देने लगी है। पिछले तीन दिनों में भाजपा के बड़े नेताओं ने अलग-अलग आंदोलन किए हैं। जिनके जरिए नेताओं ने एक दूसरे से ज्यादा ताकतवर बताने की कोशिश की है। ऐसे में पार्टी के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार प्रदेश में नेतृत्व कौन करे। किस नेताओं के इशारे पर संगठन काम करे। क्योंकि मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह को दूसरे अन्य ताकतवर नेता अभी भी कमजोर मानकर चल रहे हैं। 

मप्र भाजपा ने बिजली संकट, बच्चियों के साथ दुष्कर्म, भ्रष्टाचार, कर्जमाफी को लेकर प्रदेश में अलग-अलग नेताओं अलग-अलग आंदोलन किए हैं। खास बात यह है कि एक आंदोलन की कमान एक ही नेता के हाथ में रही, दूसरे नेता ने भागीदारी नहीं की। जबकि आमतौर पर भाजपा के सभी नेता एक ही मंच पर आकर आंदोलन में भागीदारी करते हैं। लेकिन हाल ही में हुए आंदोलनों में नेताओं ने मंच साझा नहीं किए हैं। शिवराज सिंह चौहान ने अपने स्तर पर राजधानी में बच्यिों के साथ दुष्कर्म की घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकाला। जिसमें अन्य नेता शामिल नहीं हुए। इसके अगले दिन 12 जून को शिवराज सिंह चौहान ने अपने निवास पर पत्रकारवार्ता बुलाई। जबकि इसी दिन भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में कर्जमाफी के विरोध में 2 हजार टै्रक्टरों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। कैलाश के आंदोलन में भाजपा के अन्य किसी शीर्ष नेता में हिस्सा नहीं लिया। इस तरह नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव विधानसभा में सरकार की घेराबंदी की रणनीति बना रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि भार्गव ने इस बार सत्र को लेकर किसी भी नेता से चर्चा नहीं की है। वहीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने प्रदेश भर में लालटेन एवं चिमनी यात्रा निकालने का कार्यक्रम तय किया है। संभवत: भाजपा का कमलनाथ सरकार के खिलाफ पहला बड़ा आंदोलन है। बुधवार शाम 7 बजे प्रदेश भर में बिजली कटौती के विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा। खास बात यह है कि राजधानी भोपाल में प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन होगा। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दूसरे जिले में भेज दिया है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि शिवराज सिंह चौहान पिछले 3 दिन से भोपाल में अपने स्तर पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसको लेकर उन्होंने संगठन से किसी भी तरह की चर्चा नहीं की। 


राकेश को छोटा मानते हैं बड़े नेता 

यूं तो भाजपा में संगठन ही सर्वोपरी होता है। लेकिन मप्र भाजपा के बडे नेता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह को छोटा ही मानते हैं। यही वजह है कि राकेश से बिना किसी सलाह मशविरा के अपने स्तर पर कार्यक्रम तय कर लेते हैं। इंदौर का टै्रक्टर आंदोलन और भोपाल का दुष्कर्म के विरोध में प्रदर्शन बड़े नेताओं ने अपने स्तर पर तय किए थे। 


प्रदेश का बड़ा नेता कौन 

मप्र भाजपा के नेताओं के बीच लंबे समय से चला आ रहा मनमुटाव अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। सूत्रों ने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच अनबन है। लोकसभा चुनाव में टिकट चयन को लेकर दोनों के बीच मनमुटाव की स्थिति बनी। केंद्रीय मंंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मप्र भाजपा में दखल देना बंद कर दिया है। वे सिर्फ भोपाल में मेल-मिलाव के लिए पार्टी कार्यालय पहुंचते हैं। नेेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव अपने स्तर से सरकार पर तीखा हमला बोले हुए हैं। 

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