युवाओ को स्वाभिमानी बनाने में फैल हुई कमलनाथ सरकार

भोपाल। कांग्रेस के वचन पत्र को पूरा करने राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई युवा स्वाभिमान योजना छह महीने के भीतर ही बंद हो गई है| इस योजना में युवाओं ने खूब बढ़-चढ़कर अपना पंजीयन कराया, मगर शहरी क्षेत्र में प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं होने की वजह से मात्र 17 हजार 152 युवाओं को ही ट्रेनिंग देने का काम शुरू हो सका और इसमें भी मात्र 4 हजार 127 युवाओं को स्टायपेंड का भुगतान किया गया| अब सरकार इसे पायलट प्रोजेक्ट बताकर नए सिरे से प्रारंभ करने पर विचार कर रही है| जिससे युवाओं को सरकारी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियों में भी रोजगार के अवसर मिल सकें|

इस मामले में उच्च स्तरीय बैठक के बाद में नगरीय प्रशासन विभाग प्लान तैयार करने में जुटा है| कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान घोषणा की थी कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ाने 4 हजार रुपए महीना सहायता राशि दी जाएगी| चुनाव के बाद बनी कांग्रेस सरकार ने इसके लिए मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना नाम दिया और बेरोजगार युवाओं को शहरी क्षेत्र में 100 दिन का प्रशिक्षण देने के साथ ही 4 हजार रुपए स्टायपेंड के रूप में देने का निर्णय लिया| शहरों में लागू की योजना यह योजना भोपाल सहित इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन आदि शहरों में प्रारंभ की गई|

छह माह पूर्व इस योजना में 3 लाख 93 हजार 168 युवाओं ने अपना पंजीयन कराया| इनमें से 59 हजार 946 युवाओं को ऑन बोर्ड करते हुए रोजगार से लगाया गया और 17 हजार 152 को प्रशिक्षण देने के लिए आईटीआई से एग्रीमेंट किया गया, स्टायपेंड का भुगतान भी अभी तक मात्र 4 हजार 127 युवाओं को किया गया और ट्रेनिंग के अभाव में सरकार को इस योजना को बंद करना पड़ा| 

नए सिरे से बनेगा प्लान 

पूरे मामले में नगरीय प्रशासन मंत्री का कहना है कि अभी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनिंदा शहरों में ही मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना को प्रांरभ किया था| जिसमें कुछ खामियां देखने को मिली, इस कारण युवाओं को प्रशिक्षण दिलाने में भी दिक्कतें आई। अब इस योजना को नए सिरे से प्रारंभ करने का प्लान बनाया जा रहा है|

अधिकारियों ने नहीं दी ज्यादा तवज्जो

शहरी क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षण देने प्रारंभ की गई इस योजना को नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी| योजना को लेकर कौशल विकास एवं आईटीआई के साथ मॉनिटरिंग की कमी देखने को मिली| युवाओं को प्रशिक्षण पर भेजने समय का चयन सही ढंग से नहीं किया गया| आईटीआई में ट्रेनिंग देने का काम भी काफी देरी से शुरू हुआ| जिसके कारण युवाओें का इस योजना से मोह भंग हो गया| बहरहाल अब नया स्वरूप कैसा होगा यह देखना दिलचस्प रहेगा| 

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