घर-घर विराजेंगे गजानन: जानिये पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी: देश भर में गणेशोत्सव की धूम है, आज घर-घर गौरी पुत्र गणेश विराजेंगे| बप्पा के स्वागत की जोरदार तैयारी की जा रही है| सभी देवी-देवताओं में भगवान गणेश की पहले पूजा की जाती है। जो भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, भगवान उसके सभी कष्ट दूर कर देते हैं। दस दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव में आज गजानन की प्रतिमा की स्थापना की जायेगी और पूरे दस दिनों तक भक्त उनकी सेवा सत्कार करेंगे, माना जाता है बप्पा आतें है और दस दिनों में अपने भक्तों के सभी बिगड़े काम बनाकर सारे कष्ट हरकर ले जाते हैं|  यही वजह है कि लोग उन्हें अपने घर में विराजमान करते हैं। 10 दिन बाद उनका विसर्जन किया जाता है। 


इस मुहूर्त  में करें स्थापना 

गणपति की स्‍थापना गणेश चतुर्थी के दिन मध्‍याह्न में की जाती है, मान्‍यता है कि गणपति का जन्‍म मध्‍याह्न काल में हुआ था, साथ ही इस दिन चंद्रमा देखने की मनाही होती है| इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर स्वाति नक्षत्र के साथ गजकेसरी और बुधादित्य योग बन रहे हैं। इसमें गणेश पूजन सुख-समृद्धि प्रदान करेगा। चतुर्थी बुधवार को शाम 4.07 बजे से शुरू होकर गुरुवार दोपहर 2.51 बजे समाप्त होगी। 13 से 23 सितंबर के बीच अमृत, रवि, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, सर्वार्थसिद्धि, सुकर्म और धृति योग बनेंगे।गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न 12 बजे का समय गणेश पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसीलिए पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक है। फिर भी गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:27 से दोपहर बाद 12:27 बजे तक सबसे बेहतर बताया जा रहा है।


गणपति की स्‍थापना की विधि इस प्रकार है-

-गजानन को लेने जाएं तो नवीन वस्त्र धारण करें

-चांदी की थाली में स्वास्तिक बनाकर उसमें गणपति को विराजमान करके लाएं

- चांदी की थाली संभव न हो पीतल या तांबे का प्रयोग करें

-मूर्ति बड़ी है तो हाथों में लाकर भी विराजमान कर सकते हैं

-बाजार से खरीदकर या अपने हाथ से बनी गणपति बप्‍पा की मूर्ति स्‍थापित कर सकते हैं

- गणपति की स्‍थापना करने से पहले स्‍नान करने के बाद नए या साफ धुले हुए बिना कटे-फटे वस्‍त्र पहनने चाहिए

- इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं

- आसन कटा-फटा नहीं होना चाहिए. साथ ही पत्‍थर के आसन का इस्‍तेमाल न करें

- इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को किसी लकड़ी के पटरे या गेहूं, मूंग, ज्‍वार के ऊपर लाल वस्‍त्र बिछाकर स्‍थापित करें

- गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्‍वरूप एक-एक सुपारी रखें