ओरछा में बुंदेली व्यंजनों को बनाकर बड़े चाव से खाते हैं विदेशी सैलानी

ओरछा|मयंक दुबे| पर्यटन नगरी ओरछा में बुंदेली व्यंजनों को बनाकर विदेशी सैलानी चाव से खाते हैं, ओरछा की ही रजनी चौहान विदेशियों को बुंदेली व्यंजन बनाने की ट्रेनिंग देती है| स्वयं के जीविका के साथ बुंदेली पकवानों को विदेशो तक पहुँचा रही रजनी के इस हुनर की जानकारी जैसे ही जिला प्रशासन को लगी तो जिला कलेक्टर  अक्षय सिंह पर्यटन विभाग के ओरछा प्रबन्धक संजय मल्होत्रा के साथ रजनी चौहान के कुकिंग क्लासेस में पहुँचे जहाँ उन्होंने विदेशी मेहमानों के साथ बुंदेली लजीज भोजन के बारे में जानकारी ली साथ ही रजनी के स्वयं के आत्मनिर्भर होने व बुंदेली संस्कृति के विदेशो तक पहुचाने की कला को सराहा|

नैसर्गिक सौंदर्य धर्म व पुरातत्व की नगरी ओरछा में विदेशी बुंदेली भोजन बरा, मगोरा, कड़ी, दाल, पूडी सब्जी समेत दर्जनों पकवानों को बनाने की ट्रेनिंग लेते है फिर उन्हें बनाकर खुद बड़े चाव से खाते है, कोई पूडी तो कोई दाल और कोई कड़ी बनाता है। ऐसे सैकड़ो विदेशियों को ट्रेनिग दे चुकी ओरछा की रजनी चौहान की माने तो बुंदेली व्यंजन देश विदेशो तक पहुँचे साथ ही वह स्वयं भी आत्मनिर्भर बने इस मंशा को साथ लेकर उन्होंने यह कुकिंग क्लास शुरू की थी, धीरे धीरे उनका यह हुनर जीवका का साधन बन गया अब रोजाना दर्जनों विदेशी सैलानी उनकी क्लासेज में आते है और उनके साथ भोजन बनाने की बारीकियों को सीखते है फिर बुंदेली व्यंजनों को बनाकर उनका स्वाद चखते है| 

कलेक्टर ने सराहा 

रजनी के इस हुनर की जानकारी जैसे ही निवाड़ी जिले के कलेक्टर अक्षय सिंह को लगी वह भी इस कुकिंग क्लासेज में जाने से खुद को नही रोक सके| उन्होंने भी विदेशी मेहमानों के बीच बैठकर इन व्यजनों को बनाने के तरीकों को जाना साथ ही मेहमानों से बुंदेली जायकों के स्वाद के बारे में बात की, साथ ही रजनी के स्वयं के परिवार को आत्मनिर्भर बनाने के साथ बुंदेली भोजन का विदेशो तक पहुचाने की खुले मन से प्रशंसा की । गौरतलब है कि बुन्देलखण्ड  मध्यप्रदेश के  पिछड़े इलाको में आता है ऐसे में एक महिला स्वयं के आत्मनिर्भरता के साथ बुंदेली संस्कृति को विदेशो तक पहुचाने की कहानी यह बताती है की जहाँ चाह है वहीं राह है। 







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