बिजली कटौती को लेकर शिवराज ने सरकार को घेरा, फोरम ने भी दी ये चेतावनी

भोपाल।

प्रदेश मे हो रही बिजली कटौती को लेकर प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने सख्त रवैया अपनाया हुआ है। लगातार लापरवाही अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। वही कांग्रेस आरोप लगा रही है कि इसके पीछे बीजेपी षड़यंत्र कर रही है।हाल ही में ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने भी कहा था कि मध्यप्रदेश में हो रही बिजली कटौती की साजिश बीजेपी ने रची थी। भाजपा इस कोशिश में थी कि लोकसभा चुनाव में बिजली कटौती के खिलाफ ठीक वैसा ही माहौल बने जैसा 2003 में विधानसभा चुनाव के दौरान बना था पर हम संभल गए और रात-दिन मेहनत कर कोशिश को नाकाम कर दिया। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पलटवार किया है और सभी आरोपों को निराधार बताया है।

आज मीडिया से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि यहां के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी संभवत हार से बौखलाए हुए है।एक कहावत प्रचलित है नाच ना जाने आंगन ढे़डा।संभालना आ नही रहा, स्थिति संभल नही रही और कर्मचारियों पर लट्ठ चला रहे है।आउटसोर्स वालों को देख लेंगें , सारे के सारो को निकाल देंगें।सस्पेंड कर देंगें, नौकरी से बर्खास्त कर देंगें।यह आतंकित करने की राजनीति है। शिवराज यही नही रुके उन्होंने आगे कहा यहां यह सरकार कर रही है।अगर नियंत्रण नही है तो किसलिए कुर्सी पर बैठे हो।शर्म आनी चाहिए ऐसे मंत्रियों को जो कह रहे है कि बीजेपी षड़यत्र कर रही है।इसलिए हम ये नही कर पा रहे है, अगर नही कर पा रहे है तो सरकार में क्यों बैठे हो।

वही किसानों को लेकर शिवराज ने कमलनाथ सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार गेहूं ठीक से खरीद नही पा रही हो। किसानों को पैमेंट कर नही मिल रहा है  धान उठा नही रहे है। पोर्टल खुल नही रहा। जनता बर्बाद है , त्राहि त्राहि कर रही है और दोष बीजेपी पर मढ़ रहे हो।अगर स्थिति नही संभल रही तो हटो कुर्सी से।बिजली आदि की समस्या भी बनी हुई है और कर्मचारियों पर षडयंत्र के आरोप लगाये जा रहे हैं।इससे साबित हो रहा है कि मप्र में अराजकता के हालात हैं और सरकार व सीए व्यवस्थाओं को संभाल नहीं पा रहे हैं। गौरतलब है कि विद्युत वितरण में कोताही बरतने वाले कर्मचारियों पर सरकार कार्रवाई कर रही है कईयों को निलंबित और बर्खास्त तक किया जा चुका है। 

इधर फोरम ने भी जताई नाराजगी

एक के बाद एक कर्मचारियों-अधिकारियों पर कार्रवाई करने पर म.प्र. यूनाइटेड फोरम फार पावर एमलाइज एन्ड इंजीनियर्स ने भी नाराजगी जताई है। फोरम का मानना है कि कोई भी अधिकारी-कर्मचारी अपने मन से बिजली कटौती नही करता , लेकिन जब आवश्यक हो जाता है, या कोई व्यवधान उत्पन्न हो जाता है , कोई अनहोनी होने वाली होती है तो बिजली बंद की जाती है। उन्होंने हाल ही में इंदौर और भोपाल के कर्मचारियों अधिकारियों पर की गई कार्रवाई का विरोध किया है।उन्होंने इस कार्रवाई को तत्काल रद्द करने की मांग की है, साथ ही कर्मचारी-अधिकारियों को फिर से काम पर आने के निर्देश जारी करने की बात कही है।साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर आने वालेसमय में दोबारा ऐसी कार्रवाई की गई तो फोरम इसका बहिष्कार करेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

गौरतलब है कि  शुक्रवार को बिजली सप्लाई में लापरवाही बरतने वालों के  खिलाफ बिजली कंपनी ने  कार्रवाई करते हुए कार्यपालन यंत्री (ईई), सहायक यंत्री (एई), कनिष्ठ यंत्री (जेई) और लाइनमैन समेत 85 अधिकारियों-कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था वही आउट सोर्स के 89 कर्मचारियों को भी बर्खास्त कर दिया।साथ ही कांग्रेस की बैठक में लाइट जाने पर एक इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया था, जिसके बाद से ही कर्मचारियों -अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।



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