पूर्व विस अध्यक्ष का वार- कोरोना नहीं, सरकार गिराना था BJP की पहली प्राथमिकता

भोपाल।

प्रदेश में मार्च माह में हुए सियासी उलटफेर के बीच शिवराज(shivraj) सरकार के वापस सत्ता हासिल करने के बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष(former assembly speaker) एनपी प्रजापति(N.P.Prajapati) ने अब राजभवन की भूमिका पर सवाल उठाया है। वहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि मार्च महीने के सियासी उठापटक के बीच उन पर काफी दबाव बनाया गया था। जहां बीजेपी(BJP) का पूरा ध्यान करुणा की रोकथाम पर नहीं बल्कि सरकार गिराने पर था।

दरअसल पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा है के तत्कालिन सरकार की चेतावनी के बाद भारतीय जनता पार्टी(bhartiya janta party) का पूरा ध्यान सरकार गिराने पर था ना की कोरोना(corona) की रोकथाम के लिए। वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना संकटकाल के वक्त कई राज्यों के विधानसभा स्थगित कर दी गई थी जिस पर हमने भी 26 मार्च तक विधानसभा स्थगित करने का निर्णय लिया था। किंतु कोरोना की गंभीरता को नहीं समझते हुए बीजेपी सुप्रीम कोर्ट(supreme court) चली गई थी। आज प्रदेश में कोरोना कि जो भी हालात है। यह उसी का नतीजा है। प्रजापति ने राजभवन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए भी कहा है कि सियासी उथल-पुथल के बीच उन पर भी काफी दबाव डाला गया था। जहां राजभवन से रात को 2 – 3 बजे तक चिट्टियां भेजी जाती थी। वही किसी भी वक्त बंगले का दरवाजा खटखटा दिया जाता था। इसी के साथ कुछ वक़्त के लिए उन पर भी काफी दबाव डाला गया था।

गौरतलब है कि मार्च महीने में मध्यप्रदेश में छिड़े सियासी संग्राम के बीच कांग्रेस(congress) के 22 विधायकों(MLAs) ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि इससे पहले कमलनाथ(kamalnath) से नाराज हो बंगलुरु(bangluru) के किसी रिसोर्ट(resort) में ठहरे हुए थे। जिसका आरोप कांग्रेसी बीजेपी से लगा रहे थे। इसे बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया(jyotiraditya scindia) के कांग्रेस से इस्तीफा देते ही 22 विधायकों ने इस्तीफे की पेशकश की थी। जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार नहीं किया जा रहा था। जिस मामले को लेकर बीजेपी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फ्लोर टेस्ट की स्थिति बनी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद कमलनाथ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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