हाथरस: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का योगी आदित्यनाथ पर निशाना- नहीं हैं पद पर बैठने लायक

नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए कांग्रेसी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री हर छोटी-छोटी बातों पर ट्वीट करते हैं। आखिर देश के इतने गंभीर मुद्दे पर उनकी चुप्पी का क्या कारण है

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। हाथरस(hathras) गैंगरेप केस को लेकर पूरे भारत में बवाल देखने को मिल रहे हैं लगातार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ(UP CM yogi adityanath) को आलोचना झेलना पड़ रहा है। इसी बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह(Digvijay singh) ने भी उन पर निशाना साधा है। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वह मुख्यमंत्री जैसे सम्मानित पद पर बैठने लायक नहीं है। उन्होंने गोरखनाथ के नाम को भी कलंकित कर दिया।

दरअसल शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान हैं। फिर क्या वह नहीं जानते कि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार नहीं किया जाता। आखिर उनकी पुलिस बल ने रात के अंधेरे में बच्चे का दाह संस्कार कैसे कर दिया।

वहीं नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए कांग्रेसी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री हर छोटी-छोटी बातों पर ट्वीट करते हैं। आखिर देश के इतने गंभीर मुद्दे पर उनकी चुप्पी का क्या कारण है जबकि स्मृति ईरानी पर बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा की स्मृति जी दुनिया भर की बातें करती हैं किंतु अब उनको शर्म आनी चाहिए। जो अब तक इस मामले में चुप रही हैं।

दूसरी तरफ उमा भारती की तारीफ करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी हाथरस की घटना पर योगी आदित्यनाथ सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार की छवि पर आंच ना आने की बात कही है। दिग्विजय सिंह ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि मैं बधाई देता हूं कि उमा भारती ने सिर्फ ट्वीट नहीं किया बल्कि सख्त लहजे में अपनी बात भी कही है।

बता दें कि बीते 15 दिनों से हाथरस के मामले में कई बदलाव देखने को मिले हैं। इस घटना पर योगी पुलिस एवं प्रशासन पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में पूरे भारत में योगी सरकार को आलोचना झेलना पड़ रहा है। वहीं अब इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाते हुए योगी सरकार ने अधिकारियों के निलंबन के साथ-साथ नारको टेस्ट और सीबीआई जांच की कार्रवाई की। अब ये मामला हाईकोर्ट होता हुआ सुप्रीम कोर्ट भी जा पहुंचा है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है।