MP: अतिथि विद्वान के आत्महत्या से गरमाई सियासत, कांग्रेस ने BJP को घेरा

रीवा, डेस्क रिपोर्ट

मध्यप्रदेश(madhyapradesh) में अतिथि विद्वानों(atithi vidhwan) की सरकार(government) से लड़ाई आज तक जारी है। एक तरफ जहां 9 महीने से उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ कोरोना(corona) काल में उन पर आर्थिक संकट बन आया है। प्रदेश में आ रही सरकार एक तरफ जहां इनके नाम को चुनावी मुद्दा बना रही है। वहीं दूसरी तरफ इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके बाद वेतन(salary) की कमी से जूझ रहे एक अतिथि विद्वान ने आत्महत्या कर ली है।

दरअसल रीवा जिले के अतिथि विद्वान संजीव शुक्ला आर्थिक संकट से जूझते हुए बुधवार को मौत को गले लगा लिया। वही अतिथि शिक्षकों द्वारा किए जा रहे इस तरह आत्महत्या को एक बार फिर विपक्ष ने मुद्दा बनाया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी(Former minister and Congress leader Jeetu Patwari) ने सरकार का घेराव करते हुए कहा है कि अतिथि शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है वह आत्महत्या(suicide) के लिए मजबूर है। जनसेवा की प्रतीक्षा में अतिथि विद्वान बैठे हैं। वहीं उन्होंने सिंधिया(scindia) पर तंज कसते हुए कहा है वो सड़क पर ना उतरे लेकिन इसके लिए शिवराज सरकार(shivraj government) से दवाब तो जरूर बनाएं। वहीं दूसरी तरफ अतिथि विद्वान की आत्महत्या के बाद कांग्रेस नेता सिद्धार्थ तिवारी ने कहा है कि शिवराज सरकार का चेहरा कितना भयावह हो गया है। वेतन न मिल पाने की वजह से अतिथि शिक्षक संजय शुक्ला की आत्महत्या हो गई है।वही नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति क्या बात कर रहे थे क्या वह इसी तरह गुरु के वध की बात थी क्या।

बता दें कि बीते 9 महीने से अतिथि विद्वान अपनी सेवा से वंचित है। जिसके बाद अपने नियमितीकरण को लेकर वह लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं। इसकी वजह से अबतक 5 अतिथि विद्वानों ने आत्महत्या कर मौत को गले लगाया है। हालांकि कांग्रेस(congress) की कमलनाथ सरकार(kamalnath government) ने इन्हें सेवा से बाहर कर दिया था। जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chauhan) लगातार अतिथि विद्वान के नियमितीकरण की मांग कमलनाथ सरकार से कर रहे थे। लेकिन उनकी सत्ता में वापसी के बाद भी अब तक मामला अटका हुआ है।

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