तो जल्द मिल सकती है Scindia को कैबिनेट में जगह! मोदी-शाह की बैठक के मायने, चर्चा में इनके नाम

फिलहाल कैबिनेट विस्तार में किन्हें जगह मिलती है, यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन पीएम द्वारा मंत्रियों के कार्यों की समीक्षा जारी है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देश की मोदी सरकार (modi government) जल्द ही कैबिनेट का विस्तार (cabinet expansion) कर सकती है। दरअसल मानसून सत्र से पहले कैबिनेट के विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की जा रही है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश के ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) सहित बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (sushil modi) और असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल (Sarbananda Sonewal) को जल्द ही मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

हालाकि मोदी कैबिनेट के विस्तार से पहले ही मध्यप्रदेश में सिंधिया (scindia) का दबदबा एक बार फिर से दिखने लगा है। सिंधिया इन दिनों मध्य प्रदेश (madhya pradesh) की यात्रा पर थे। इस दौरान उनके आक्रमक रुख नजर आ रहे थे। उधर केंद्रीय मंत्रिमंडल के कामकाज की समीक्षा की जा रही है। चर्चा है कि अब तक 2 दर्जन से अधिक मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की जा चुकी है और मानसून सत्र (monsoon session) से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है।

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अभी मोदी सरकार में 60 मंत्री है जबकि संविधान के अनुसार मोदी सरकार में मंत्रियों की संख्या 79 हो सकती है। इसके अलावा कई मंत्री ऐसे हैं। जिन्हें दो से तीन मंत्रालय सौंपा गया हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) और गृह मंत्री अमित शाह (amit shah)की बंद कमरे में चर्चा हुई है। बता दे कि मोदी मंत्रिमंडल को बढ़ाने की कवायद कई महीनों से चल रही है लेकिन कोरोना के पहले संक्रमण काल और दूसरी लहर के बीच यह काम अधर में लटका रहा।

वहीं जिन लोगों को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। उनमें सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित बैजयंत पांडा, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (sushil modi) के नाम चर्चा में है। खास बात यह भी है कि भाजपा के सहयोगी दलों में से अभी एक भी कैबिनेट मंत्री नहीं है।

बता दें कि मोदी सरकार द्वारा 30 मई 2019 को संतान मंत्री के साथ शपथ ली गई थी। जिसमें से दो मंत्री रामविलास पासवान और सुरेश अंगड़ी का अब तक निधन हो चुका है जबकि 2 कैबिनेट मंत्री हरसिमरत कौर बादल और अरविंद सावंत इस्तीफा दे चुके हैं। इसके अलावा रामविलास पासवान के निधन के बाद केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय सौंपा गया है। नरेंद्र सिंह तोमर के पास कृषि, ग्रामीण विकास, खाद्य प्रसंस्करण और पंचायती राज मंत्रालय शामिल है।

इसके अलावा केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजूजी को आयुष मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। प्रकाश जावेडकर को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री के अलावा पर्यावरण और भारी उद्योग मंत्रालय के प्रभार भी दिए गए है। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार की खबर सुनकर अब बिहार में सियासी पारा चढ़ गया है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (nitish kumar) की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (janta dal united) के अध्यक्ष आरसीपी सिंह (RCP Singh) ने कहा एनडीए (NDA) के साथियों को सम्मान के साथ मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाना चाहिए। जेडीयू अध्यक्ष सिंह ने कहा कि चर्चा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार जल्दी किया जा सकता है। ऐसे में मंत्रिमंडल के विस्तार में जगह देकर भाजपा को अपने सहयोगी दलों को सम्मान सहित कार्यभार सौंपा जाना चाहिए।

हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक आधिकारिक कुछ गतिविधि केंद्र सरकार की तरफ से दिखाई नहीं दे रही है। बावजूद इसके सहयोगी दलों द्वारा ऐसी मांग निश्चित ही मोदी सरकार के लिए असमंजस की स्थिति लेकर आएगी। फिलहाल कैबिनेट विस्तार में किन्हें जगह मिलती है, यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन पीएम द्वारा मंत्रियों के कार्यों की समीक्षा जारी है।