शिवराज का James Bond मिशन

भोपाल।

मध्यप्रदेश(madhyapradesh) में कोरोना(corona) संकटकाल और लॉकडाउन(lockdown) के बीच प्रदेश की शिवराज सरकार(shivraj government) ने दो महीने के अंदर ही एक जेम्स बांड(james bond) जैसे मिशन(mission) को अंजाम दिया है। जिसके तहत मध्यप्रदेश के इतिहास में इस बार सबसे ज्यादा गेहूं खरीदी दर्ज की गई। गेहूं खरीदी के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब(punjab) के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। इस व्यापक संकट में भी गेहूं विक्रय के लिये 20 मई तक19.52 लाख किसानों ने पंजीयन(registration) कराया। जो पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा है। इसकी जानकारी खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(shivraj singh chouhan) ने ट्विटर(twitter) के माध्यम से दी है।

शिवराज ने ट्वीट(tweet) कर लिखा है कि चलिए आज मैं मेरे प्रदेश के मेहनतकश किसान भाइयों-बहनों की तरफ़ से देश ले साथ अच्छी खबर शेयर कर रहा हूँ। कोरोना के बावजूद हमारी टीम मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। ये पूरा मिशन किसी जेम्स बॉंड के मिशन से कम नहीं था। आज तक हमने 1.10 लाख मेट्रिक टन गेहूं को न्यूनतम सपोर्ट मूल्य पर ख़रीदा है, जो मार्केट रेट से 10% तक अधिक है। कोरोना के इस कठिन दौर में कम से कम 2500 करोड़ रूपए की अतिरिक्त राशि मेरे किसान भाइयों-बहनों के अकाउंट में जमा हो गई है। इससे ज़्यादा ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है? हर किसान के खाते में सीधे सिर्फ़ 10 दिन के भीतर पैसे जमा हो रहे है, वो भी बिना किसी तकलीफ़ के…और एक अच्छी बात बताऊँ? मेरे हर एक किसान भाई-बहन ने हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दिए हुए ‘दो गज की दूरी’ के मंत्र का अक्षरशः पालन किया, और किसी भी उपार्जन केंद्र पर से अब तक किसी भी तरह के कोरोना संक्रमण का समाचार नहीं आया है।

दरअसल, गत वर्ष 19.81 लाख पंजीकृत किसानों में से 9.66 लाख यानी 49 प्रतिशत किसानों ने ही वास्तविक तौर पर उपार्जन केंद्रों में जाकर अपनी फसल बेची थी, लेकिन इस वर्ष 20 मई तक 19.52 लाख किसानों में 13.87 किसान यानी 71 प्रतिशत किसानों ने खुद उपार्जन केंद्र जाकर अपनी फसल का विक्रय किया। गत वर्ष इसी अवधि में प्रदेश के किसानों से 73.65 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था, लेकिन इस बार अब तक 15 लाख किसानों से 110 लाख मीट्रिक टन का उपार्जन किया जा चुका है। अभी भी मई माह को पूरा होने में कुछ दिन बचे हैं। इस बार किसानों को अपनी फसल बेचने के लिये अन्य माध्यम जैसे सौदा पत्रक और प्राइवेट खरीदी केंद्र की व्यवस्था भी की गई, लेकिन उपार्जन केंद्रों पर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की गई सुदृढ़ व्यवस्था और अन्य सेवाओं के कारण किसानों ने प्राथमिकता से उपार्जन केंद्रों पर जाकर अपनी फसल का सौदा किया।