राज्यसभा चुनाव : बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन पर फँसा पेंच, कॉंग्रेस के स्वीकृत

भोपाल। प्रदेश की सियासी गतिविधियों के बीच राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार बने भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं सुमेर सिंह सोलंकी के नामांकन पर कांग्रेस(congress) द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई है। जहां दोनों पर आरोप है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने नामांकन पत्र में अपने ऊपर चल रहे केस का जिक्र नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ सुमेर सिंह सोलंकी के मामले में यह कहा गया है कि जिस दिन उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया था, उस दिन वह शासकीय नौकरी में थे। उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया था। इस वजह से इन दोनों नामांकन पत्र को निरस्त किया जाए। वहीं कांग्रेस के राज्यसभा प्रत्याशी दिग्विजय सिंह फूल सिंह बरैया और भाजपा नेता रंजना बघेल के नामांकन पत्र स्वीकार किए गए है। इन आपत्तियों के बाद राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी एपी सिंह ने सिंधिया और सुमेर सिंह के प्रतिनिधियों से अपने नेताओं के नामांकन पर उठाई गई आपत्ति पर जवाब देने को कहा है।

दरअसल विधानसभा सचिवालय ने कांग्रेस के राज्यसभा प्रत्याशी दिग्विजय सिंह(digvijay singh) और फूल सिंह बरैया के राज्यसभा चुनाव(rajyasabha election) के नामांकन पत्र तथा साथ ही भाजपा(bhajpa) नेता रंजना बघेल(rajana baghel) के नामांकन पत्र को स्वीकार कर लिया है तो वही ज्योतिरादित्य सिंधिया(jyoiraditya scindia) और सुमेर सिंह सोलंकी(sumer singh solanki) पर मामला छिपाने और शासकीय कार्य में रहते हुए नामांकन पत्र भरने की वजह से नामांकन में पेंच फंस गया है। भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया पर नामांकन पत्र में अपने ऊपर चल रहे केस के विषय में मामला छुपाने तथा सुमेर सिंह सोलंकी के प्रशासनिक कार्य में रहते हुए नामांकन पत्र दाखिल करने पर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है। जिसके बाद अब मंगलवार को सिंधिया और सोलंकी के फॉर्म की समीक्षा होगी। जहां यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का राज्यसभा नामांकन निरस्त भी हो सकता है। बता दे कि दिग्विजय सिंह ने सिंधिया के नामांकन पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने आपराधिक प्रकरणों का उल्लेख नामांकन पत्र में नहीं किया है। उन पर जमीन विवाद के कई आपराधिक मामले दर्ज है।

आपको बता दें कि इन आपत्तियों के अलावा आदिवासी समाज भी सुमेर सिंह से नाराज़ है और उसने अपनी नाराजगी दिखाते हुए सोलंकी का पुतला दहन किया। सुमेर सिंह सोलंकी ने राज्यसभा के लिए जो बायोडाटा पेश किया था उनके मुताबिक वो 8 वर्षों से सक्रिय होकर आदिवासियों के विभिन्न संगठनों के खिलाफ कार्य कर रहे थे। आदिवासी संगठनों का यह कहना है जिसने आरक्षण पर नौकरी ली और यहां तक पहुंचा वह व्यक्ति अगर समाज के बारे में ऐसी बात करें तो वह समाज में रहने लायक नहीं है। जिसको लेकर लोगों में गुस्सा था और इस वजह से डॉक्टर सोलंकी का पुतला दहन किया गया।

दरअसल मध्य प्रदेश में 3 राज्यसभा सीटों के लिए सदस्यों का चुनाव होना है। चुनाव 26 मार्च को है और इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी के फॉर्म पर आपत्ति ने प्रदेश की सियासी गतिविधियों में एक नई जान फूंक दी है। अब देखना है विधानसभा सचिवालय द्वारा इन दोनों नामांकन पत्र पर क्या समीक्षा होती है।