27% OBC आरक्षण पर बड़ी अपडेट, हाई कोर्ट का आदेश होगा काफी अहम, सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रखेंगे पक्ष

मामले की सुनवाई लंबे समय से हो रही है। हालांकि आज इस पर महत्वपूर्ण फैसला देखने को मिल सकता है।

जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण (MP OBC reservation) को लेकर आज फिर हाई कोर्ट (MP High court) में अहम सुनवाई होगी। दरअसल जबलपुर हाईकोर्ट (jabalpur high court) में दोपहर 1:00 बजे होने वाली सुनवाई में जस्टिस सी नागू की डबल बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई की जाएगी। बता दे कि एक साथ 62 याचिकाओं पर जबलपुर हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता (Tushar mehta)  अपना पक्ष रखेंगे।

बता दे संवैधानिक रूप से ओबीसी आरक्षण के 27 फीसद को चुनौती देने वाली 32 याचिकाएं सहित 27% ओबीसी आरक्षण के समर्थन में दायर इस याचिका की संयुक्त सुनवाई 23 जून को होनी है। इससे पहले बुधवार को किसी कारणवश सुनवाई नहीं की जा सकी थी। इन याचिकाओं में सामान्य वर्ग की याचिकाकर्ता की तरफ से वकील आदित्य संघी, शासन की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अलावा रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद साह अपना पक्ष रखेंगे। मामले की सुनवाई लंबे समय से हो रही है। हालांकि आज इस पर महत्वपूर्ण फैसला देखने को मिल सकता है।

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आज आने वाले ओबीसी आरक्षण के बाद भविष्य को लेकर दिशा और दशा प्रभावित हो सकती है। सरकारी नौकरी में 27% आरक्षण देने को लेकर यह पूरा मामला तैयार किया गया है। इससे पहले 2018 में कमलनाथ की सरकार द्वारा ओबीसी को 27% आरक्षण देने की बात कही गई थी लेकिन हाईकोर्ट में कई तरह की याचिका प्रस्तुत की गई। जिसके बाद यह मामला उलझता गया। इससे पहले लंबे समय से यह मामला कानूनी तो दांव पेंच में अटका हुआ है। जिसके बाद आज होने वाली सुनवाई कई तरह से चीजों को स्पष्ट कर सकती है।

वहीं कांग्रेस द्वारा समय-समय पर ओबीसी आरक्षण को लेकर बीजेपी पर सवाल खड़े किए जाते हैं। बीते दिनों OBC आरक्षण को लेकर कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी का रुख स्पष्ट नहीं था और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी जश्न मना रही थी। कांग्रेस का कहना था कि 2003 में दिग्विजय सिंह की सरकार के समय ही ओबीसी को 27% आरक्षण दिया गया था लेकिन 15 साल के बाद भी शिवराज सरकार ओबीसी के लिए कुछ नहीं कर है।

बीजेपी ने गलत तरीके से ऑर्डिनेंस लाए और कोर्ट में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में दावा किया गया। वह पूरी तरह से गलत है क्योंकि पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की गई है। बता दें कि इससे पहले विषय पर की रिपोर्ट के आधार पर शिवराज सरकार ने ओबीसी को 35% आरक्षण देने की बात कही थी।