विधायकों की किला ‘बंदी’, अधिकारी बोले “गए तो बाघ खा जाएगा”

पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा का आरोप है कि दरअसल सरकार रानी कमलापति के महल की बदहाली को जनता के सामने नहीं आने देना चाहती

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। पूर्व मंत्री और कांग्रेस (congress) के वरिष्ठ नेता सज्जन वर्मा (sajjan verma) ने प्रदेश सरकार पर जनजाति वर्ग, उनकी संस्कृति और अस्तित्व पर को चोट पहुंचाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रानी कमलापति (Rani kamlapati) के किले की दुर्दशा का निरीक्षण करने के लिए कांग्रेस विधायक दल को अधिकारियों ने बाघ मूवमेंट का बहाना बनाकर अनुमति नहीं दी।

हबीबगंज रेलवे स्टेशन (habibganj railway station) का नाम गोंड रानी कमलापति के नाम पर करने के बाद कांग्रेस ने इसे शिवराज सरकार (Shivraj Government) का पॉलीटिकल स्टंट बताया था। इसके बाद कांग्रेस की तरफ से बयान आया था कि गिन्नौरगढ़ में रानी कमलापति का किला बदहाली और गुमनामी का शिकार है। पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा का कहना है कि जब वे इस किले का निरीक्षण करने गए तो उन्हें मुख्य द्वार पर ही रोक दिया गया। इसके बाद कांग्रेस के विधायकों की एक समिति प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने बनाई और उसे गिन्नौरगढ़ के किले का निरीक्षण के लिए जाने को कहा।

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इस समिति में कांग्रेस विधायक सज्जन वर्मा, ओमप्रकाश मरकाम, हीरालाल अलावा, पान्छी लाल मीणा और बलवीर सिंह तोमर शामिल थे। 13 दिसंबर को इस समिति के गिन्नौरगढ़ दौरे के लिए सीहोर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ने वन मंडल अधिकारी अब्दुल्लागंज को आवेदन पत्र अनुमति के लिए दिया लेकिन वन मंडल अधिकारी की तरफ से जवाब आया कि इस इलाके में बाघ मूवमेंट है और इसके चलते किसी भी तरह का खतरा विधायकों को हो सकता है।

साथ ही बाघ गणना का हवाला देकर विधायकों के प्रतिनिधिमंडल को जाने की अनुमति नहीं दी गई। पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा का आरोप है कि दरअसल सरकार रानी कमलापति के महल की बदहाली को जनता के सामने नहीं आने देना चाहती,  इसीलिए विधायकों की समिति के जाने पर रोक लगा दी गई। पूर्व मंत्री का कहना है कि कांग्रेस ने इस महल के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया है और इसके किले की वास्तविक हालात अब जनता के सामने लाकर ही रहेंगे।