Indian Post : डाक विभाग का विश्वास पर डाका, सात समंदर पार नहीं पहुंचा तोहफा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। भारतीय डाक सेवा (Indian Post) पर आपको कितना विश्वास है? ज़ाहिर सी बात है सरकारी सेवा होने के कारण कोई भी व्यक्ति कुरियर-पार्सल आदि भेजने के लिए इसपर अधिक भरोसा करेगा। लेकिन क्या हो अगर इस विश्वास के साथ साथ आपका बहुमूल्य सामान भी खो जाए? ऐसा ही कुछ हुआ है ग्वालियर जिले के डबरा में रहने वाले गौरव शर्मा के साथ।

गौरव शर्मा की बहन प्रियंका शर्मा ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहती हैं। कुछ ही समय पहले उनके घर एक बेटे का जन्म हुआ है। इनके यहां परंपरा है कि बहन के घर बच्चे का जन्म होने पर जब वो पहली बार पूजा में बैठती है तो मायके का लूघड़ा ओढ़कर बैठती है। ये मौका सभी के लिए बहुत खास होता है और गौरव शर्मा तथा उनके माता पिता के लिए तो ये बहुत ही भावुक क्षण था, क्योंकि उनकी बेटी उनसे हजारों किलोमीटर दूर रह रही है। वे सब भले ही प्रत्यक्ष रूप से उसकी खुशी में शामिल न हो पाएं, लेकिन उन्होने इस खास पूजा के लिए सारे परिवार के शगुन के कपड़े भेजे। इसमें प्रियंका का लूघड़ा, साड़ी, नवजात सहित बड़े बेटे के कपड़े और दामाद के कपड़े भी शामिल थे। इस तरह कुल मिलाकर 16 नग कपड़े गौरव शर्मा ने भारतीय डाक (Indian Post) के ज़रिये ट्रैकिंग एंड आर्टिकल नंबर (Article Number : EI384313349IN/6973384313349) के अंतर्गत 21 जून 2022 को दोपहर 02:01 पर सिडनी पार्सल किए। ये पार्सल 4.35 किलो का था और इसके लिए उन्होने डाक विभाग को चार हजार तीन सौ साठ रुपए की राशि चुकाई। लेकिन ये राशि उनके लिए मायने नहीं रखती थी क्योंकि इस पार्सल में केवल कपड़े नहीं..पूरे परिवार का नेह और आशीर्वाद शामिल था।

सिडनी में प्रियंका इस पार्सल का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। उसे भी उस अनजान शहर में अपनों के प्यार की गर्मी से भरे कपड़ों की प्रतीक्षा थी। पार्सल उसके घर पहुंचा..और जब प्रियंका ने उसे खोला तो वह हक्की बक्की रह गई क्योंकि उसमें से गाड़ियों में इस्तेमाल किए जाने वाला ग्रीस का डिब्बा और उसके पति की सिर्फ एक टीशर्ट निकली।

ये घटना प्रियंका, गौरव और पूरे परिवार वालों के लिए एक सदमे की तरह है। इस बारे में गौरव शर्मा से जब हमारी बात हुई तो उन्होने कहा कि बात सिर्फ कपड़ों की नहीं है। इस चोरी की वजह से उनकी बहन को पूजा में अपने मायके के कपड़ों से महरूम रहना पड़ा। जीवन का इतना बड़ा अवसर हमेशा के लिए एक कड़वी याद में बदल गया। गौरव का कहना है कि अगर कपड़ों के पैसे वापिस भी मिल जाते हैं तब भी वो अवसर तो लौटकर नहीं आएगा। उन्होने जिस भरोसे के साथ भारतीय डाक विभाग के मार्फत अपना प्रेम बहन तक पहुंचाने की कोशिश की, वो भरोसा अब हमेशा के लिए टूट गया है। उनका कहना है कि अब वो जीवन में कभी भी इंडियन पोस्ट की सेवाओं पर विश्वास नहीं कर पाएंगे और ना ही अपने किसी परिचित या नजदीकी को इसकी सेवा लेने की सलाह देंगे।

हालांकि ये कोई पहला मौका नहीं है जब इंडियन पोस्ट द्वारा भेजे गए सामान की इस तरह की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी डाक विभाग से सामान चोरी होने, सामान बदलने, आधा अधूरा सामान पहुंचने, पार्सल कटा फटा होने जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही है। खासकर विदेशों में भेजे जाने पार्सल-कूरियर के साथ तो ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं क्योंकि उसमें अधिक कीमती सामान होने की संभावना रहती है। अब ये गड़बड़ी डाक विभाग के स्तर पर होती है या कस्टम विभाग में जाकर, इसका कोई जवाब नहीं है। लेकिन आम व्यक्ति तो डाक विभाग पर भरोसा करके ही अपने प्रियजनों के लिए महंगे से महंगा सामान भिजवा देता है। इसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि इसमें उसके जज्बात भी शामिल होते हैं।

गौरव शर्मा का कहना है कि इंडियन पोस्ट ने सिर्फ उनके सामान पर नहीं, भावनाओं पर भी डाका डाला है और अब वो इसके खिलाफ कन्जूयमर फोरम में शिकायत करने की ठान चुके हैं। उन्होने भारतीय कस्टम विभाग पर भी सवालिया निशान उठाए हैं। गौरव का कहना है यदि सामान भारत में ही चोरी हो गया था और इंडियन पोस्ट के कर्मचारी द्वारा ही पार्सल में ग्रीस का डिब्बा रख दिया गया था तो इस पार्सल को कस्टम द्वारा क्लीयरेंस कैसे दिया गया? और अगर ऐसा नहीं है तब शक की सुई कस्टम के अधिकारियों की ओर भी इशारा करती है। हालांकि जब सामान पहुंचाने की जिम्मेदारी भारतीय डाक विभाग ने ली थी तो सामान सुरक्षित पहुंचे ये सुनिश्चित करना भी डाक विभाग की ही जिम्मेदारी है।

उन्होने कहा है कि वो इस कृत्य के खिलाफ आवाज़ उठाएंगे ताकि आगे किसी और के साथ ऐसी घटना न घटे। जिस महत्वपूर्ण अवसर के लिए उन्होने बहन को पार्सल भेजा था, वो तो निकल गया लेकिन अब वो इस मामले को किसी भी कीमत पर हाथ से नहीं निकलने देंगे। गौरव का कहना है कि इसके लिए जो भी दोषी है, वे उसे सजा दिलाने के लिए कानूनी स्तर पर हरसंभव कार्रवाई करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें अपना सामान वापिस चाहिए और ये भरोसा भी कि आगे किसी और के साथ ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।