मप्र विधानसभा : अनुपूरक बजट में रोजगार-कृषि पर विशेष फोकस, जानें किसको क्या मिला

मप्र विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 4587 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया और हंगामे के चलते बिना चर्चा के ही पास कर दिया गया।

मप्र विधानसभा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट।  मप्र विधानसभा का 4 दिवसीय मानसून सत्र (mp assembly monsoon session) हंगामे के चलते डेढ़ दिन में ही खत्म हो गया।हालांकि आदिवासियों और ओबीसी आरक्षण पर विपक्ष के हंगामे के बीच शिवराज सरकार ने अनुपूरक बजट (supplementary budget) समेत अवैध कॉलोनी को वैध करने और जहरीली शराब से मौत पर फांसी की सजा के प्रावधान वाले विधेयक समेत कई विधेयक को पास करा लिया।खास बात ये रही कि कोरोना काल को देखते हुए इस बार पहले अनुपूरक बजट में शिवराज सरकार ने कृषि, रोजगार और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस रखा।

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अनुपूरक बजट में मंगलवार को मप्र विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा (Finance Minister Jagdish Deora) ने 4587 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया और इस पर चर्चा के लिए 2 घंटे का समय तय किया गया था। लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष गिरिश गौतम ने अनुपूरक बजट को पारित कर दिया गया।करोड़ों के इस बजट में शिवराज सरकार ने युवाओं के रोजगार (Employment), कृषि और कोरोना काल-बाढ़ को देखते हुए स्वास्थ्य पर विशेष फोकस किया है। वही चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभागों को भी अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई गई है।

इस बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (national health mission) के लिए 2 हजार करोड़, कोविड-19 का उपचार एवं प्रबंधन के लिए 108 करोड़, मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए 3 करोड़ 79 लाख, मुख्यमंत्री जलकल्याण (संबल) योजना को 250 करोड़, स्मार्ट सिटी के लिए 150 करोड़, अल्पसंख्यक बाहुल्य जिलों में विकास कार्यक्रम के लिए 101 करोड़, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए 75 करोड़ दिए गए।

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इसके अलावा विधायक स्वेच्छानुदान निधि से आर्थिक सहायता के लिए 50 करोड़, राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission) द्वारा परीक्षाओं के आयोजन के लिए 34 करोड़, सड़क और शासकीय आवासों की मरम्मत के लिए 33 करोड़, जैविक कृषि समर्थन कार्यक्रम (प्रतिपूर्ति) के लिए 38 करोड़, कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए 23 करोड़ का प्रविधान किया गया है। EVM और वीवीपैट के लिए गोदाम निर्माण योजना के लिए 19 करोड़ रुपये का प्रविधान रखा है। इसके अलावा कई योजनाओं के लिए प्रतीक स्वरूप 100-100 रुपये का प्रविधान किया गया है।