लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 5 तत्काल प्रभाव से निलंबित, 211 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी

157 शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है।

MP NEWS

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश में अधिकारी कर्मचारियों (MP Employees) पर कार्रवाई (MP Suspend-Notice) का सिलसिला जारी है। दरअसल एक तरफ जहां जबलपुर में आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदेश भर में हो रहे हड़ताल के बीच 53 शिक्षकों को नोटिस (notice) जारी किया गया है। वहीं जबलपुर में हड़ताल पर जाने के लिए अवकाश देने वाले सभी शिक्षकों का डाटा तैयार किया जाएगा। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि शिक्षकों को नोटिस देने का सिलसिला जारी है।

इन शिक्षकों की बढ़ती संख्या चिंता का कारण बनी हुई है। स्कूल में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसकी जानकारी मिलते ही विभाग ने नोटिस जारी किया जाता है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय को भी जानकारी दी जा रही है। दरअसल मध्यप्रदेश में अध्यापक शिक्षक संघ के पदाधिकारी द्वारा प्रदेश भर में 75 हजार के आसपास शिक्षक राजधानी भोपाल में जमा होंगे।

पुरानी पेंशन योजना की बहाली सहित क्रमोन्नति समय मान वेतनमान और अनुकंपा आदि मामलों में हड़ताल में शामिल होने वाले शिक्षकों पर अब कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। जबलपुर से निकलने वाले 53 शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया गया है। साथ ही उन पर कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं दूसरी तरफ देवास जिले में पिछले दिनों उज्जैन रोड रेलवे ब्रिज के नीचे हत्या के मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिसमें बुजुर्ग व्यक्ति की पिछले दिनों हुई हत्या के मामले में मृतक अपनी पत्नी को लेकर कोतवाली थाने पहुंचा था और पुलिस से मदद की गुहार लगाई थी।

हालांकि देवास पुलिस द्वारा मृतक की बात को गंभीरता से नहीं लिया गया और उसी शाम उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में लापरवाही बरतने पर एसपी शिवदयाल सिंह ने मोती बंगला बीट प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित (Suspend) कर दिया है। जिन पुलिसकर्मियों पर निलंबन की गाज गिरी है। उसमें राधेश्याम शर्मा, अनिल पांडे, रघुनंदन मुकाती, सुनील देथलिया और कीरत सिंह शामिल है।

वहीं एक अन्य कार्यवाही खंडवा जिले में की गई है। जहां आजाद अध्यापक शिक्षक संघ मध्य प्रदेश के पुरानी पेंशन योजना की लड़ाई लड़ने घर से निकले खंडवा के 157 शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है।

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने बिना अनुमति हड़ताल में शामिल होने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही स्कूल से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने पर 157 महिला और पुरुष शिक्षकों को नोटिस जारी करते हुए कहा गया कि इस प्रकार के हड़ताल में शामिल होना मतलब मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 (1) (2) (3) और नियम 6 और 7 के विपरीत कदाचार की श्रेणी में शामिल होना है। वहीं शिक्षकों को नहीं बदला जाता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले विधानसभा सत्र के पहले दिन 13 सितंबर को ऐतिहासिक आंदोलन की शुरुआत की गई थी। 75000 शिक्षकों द्वारा हड़ताल में जाने के लिए छुट्टी के आवेदन दिए गए हैं। यह भी दावा किया गया है कि शिक्षकों के परिवार वाले ने तिलक लगाकर शिक्षकों को रवाना किया। इस दौरान शिक्षक पुरानी पेंशन योजना, समयमान- वेतनमान, क्रमोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में थे।

वहीं एक अन्य कार्रवाई में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद आईएफएस अधिकारी पर कार्रवाई नहीं किए जाने के मामले में वन विभाग को नोटिस जारी कर दिया। इस मामले में विभाग से जवाब मांगा गया है। बता दें कि जांच में दोषी होने के बावजूद अधिकारी को प्रमोशन दिया गया है। जिस पर हाईकोर्ट में चुनौती याचिका दायर की गई।

मामले में प्रमुख मुख्य वन संरक्षक को नोटिस जारी किया गया है। डिप्टी कंजरवेटर फॉरेस्ट पद से रिटायर हुए मधुकर चतुर्वेदी ने रायसेन डीएफओ अजय पांडे के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। चतुर्वेदी ने दावा किया है कि पांडे होशंगाबाद में पदस्थ थे। बिना टेंडर बुलाए पौधे खरीदे थे। जिस कंपनी से पौधे खरीदे गए थे। वह भी फर्जी था। ऐसी स्थिति में खरीद-फरोख्त सिर्फ कागजों पर हुई है जबकि विभागीय जांच भी पाया गया है।

बाबूजी देश के किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 2 साल के समय बीत जाने के बाद डीपीसी के माध्यम से अधिकारी को प्रमोशन दे दिया गया है। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगे गए हैं।