अनोखी शव यात्रा: बैंड-बाजे की ताल पर थिरके लोग, मातम के बीच मनाई खुशियां, जानें मामला

98 वर्षीय वृद्ध की अंतिम इच्छा पर लोगों ने निकाली उत्सव के साथ शव यात्रा।

धार, डेस्क रिपोर्ट। अक्सर जब भी कोई शव यात्रा निकलती है तो उसमें शामिल लोग गमगीन नजर आते हैं, लेकिन मनावर के ग्राम बालीपुर में एक ऐसी अनोखी शव यात्रा देखने को मिली जिसमें शामिल लोग बैंड-बाजे की ताल पर नृत्य करते हुए नज़र आए।

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दरअसल धार के ग्राम बालीपुर में 98 वर्षीय सिर्वी समाज के प्रमुख टीकम जमादारी का आकस्मिक निधन हो गया। वे राजस्थान के प्रसिद्ध पारंपरिक खेल नृत्य अंटिया खेलने में माहिर थे। उनहोंने अपनी मृत्यु से पहले अपने परिजनों और समाज के पंचों से कहा था कि जब भी उनकी मृत्यु हो तब उनकी शव यात्रा में शोक मनाने के बजाए अंटिया नृत्य व भजनों के साथ उत्सव मनाते हुए निकालें। तभी उनकी इसी अंतिम इच्छा की पूर्ति करते हुए समाजजनों ने कुल देवी के भजनों पर नृत्य करते हुए गांव में उनकी शव यात्रा निकाली। इस अनोखी शव यात्रा को देखकर हर कोई हैरान था, क्योंकि अक्सर शव यात्रा गमगीन होकर निकाली जाती थी लेकिन बालीपुर गांव में एक अनोखी शव यात्रा देखने को मिली।

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गौरतलब है कि अध्यात्मिक गुरू ओशो ने भी कहा था कि ’’जब मनुष्य पैदा होता है तो खुशियां मनाई जाती है तो फिर मृत्यु के बाद शोक क्यों मनाया जाता है। मृत्यु को भी उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए’’। इसी बात को ग्राम बालीपुर धाम के के सिर्वी समाज ने चरितार्थ किया ।