मध्य प्रदेश की इन 11 सीटों पर बीजेपी को हार का खतरा, इनमें आठ आरक्षित सीटें

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भोपाल। आम चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। कांग्रेस और भाजपा समेत अन्य दलों ने कमर कसना शुरू कर दी है। इस बार देश में मोदी लहर का प्रभाव नहीं है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस बार बीजेपी के लिए 2014 का प्रदर्शन दोहराना मुश्किल साबित होगा। वहीं, मध्य प्रदेश में भी बीजेपी को कई सीटों पर हार का खतरा सता रहा है। बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। बीजेपी ने पहल लिस्ट में 15 उम्मीदवारों का ऐलान किया है। इसमें पांच वर्तमान सांसदों के टिकट काटे गए हैं। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 10 अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। कांग्रेस की पहली सूची में भोपाल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित नौ उम्मीदवारों के नाम हैं, जबकि भाजपा ने मुरैना से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित 15 उम्मीदवारों की घोषणा की है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बार बीजेपी को तगड़ा झटका लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बार बीजेपी को 11 सीटों पर खतरा है। इनमें से आठ सीटें आरक्षित बताई गई हैं। जिन सीटों पर पार्टी को हार मिल सकती है उनमें मुरैना, भिंड, ग्वालियर (चंबल क्षेत्र), टीकमगढ़, शहडोल, मंडला, देवास, रतलाम, धार, बैतूल और राजगढ़ में हार सकती है। प्रदेश में कांग्रेस को मिली विधानसभा चुनाव में जीत के बाद सभी सीटों पर जीत का लक्ष्य तय किया है। बीजेपी भी अपना वर्चस्व कायम रखना चाहती है। इसलिए संघ के कहने पर टिकट वितरण किया जा रहा है। संघ ने अपने सर्वे में 16 सांसदों की रिपोर्ट खराब बताई थी। जिनका टिकट कटना तय माना जा रहा है। इनमें से पहली लिस्ट में 5 का टिकट कट चुका है। 

सागर में हाल ही में 10 मार्च को आयोजित की गई रैली में भाजपा प्रमुख अमित शाह ने सभी 29 सीटें जीतने का दावा किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करने का आग्रह किया। इससे पहले, कांग्रेस महासचिव और गुना निर्वाचन क्षेत्र से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भोपाल में आभार रैली में इसी तरह की शपथ ली थी।

हालाँकि, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में कोई भी पार्टी चुनाव में एकतरफा परिणाम नहीं ला सकती है, लेकिन फिर भी अगर विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने जिस तरह से मतदान किया और अगर वह वैसे ही लोकसभा में करती है, तो भाजपा अपनी 2014 में जीती 27 सीटों में से 11 कांग्रेस के हाथों खो देगी। यहां आपको बता दें कि भाजपा ने 2015 में झाबुआ-रतलाम सीट पर हुए उपचुनाव में अपनी सीट कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया के हाथों गंवा दी थी। यहां पहले भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया चुनाव जीते थे जिनकी बीमारी से मौत हो गई थी।