कांग्रेस का दावा- विंध्य और महाकौशल के 50 BJP विधायकों ने बनाई दूरी, वरिष्ठ भी दरकिनार

नरेंद्र सलूजा ने आगे कहा कि पहली बार भाजपा के किसी वर्ग में वरिष्ठ नेताओं को पूरी तरह से दरकिनार किया गया, उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में चल रहे बीजेपी (BJP) के प्रशिक्षण शिविर पर एमपी कांग्रेस (MP Congress) ने तंज कसा है। कांग्रेस ने इस पूरे शिविर को फ्लॉप बताया है। कांग्रेस का दावा है कि इस शिविर में विंध्य और महाकौशल क्षेत्र (Vindhya and Mahakoshal regions) से बड़ी संख्या में विधायकों ने दूरी बनाई है।कांग्रेस का कहना है कि इस परीक्षण वर्ग के बुरी तरह से फ़्लॉप होने के बाद यह कहा जा सकता है कि भाजपा की लालटेन जल्द बुझना तय है।

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मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित भाजपा के दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग पूरी तरह से फ्लॉप हो गया। भाजपा का संगठन इस प्रशिक्षण वर्ग में भले 126 विधायकों के आने का दावा कर रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि 50 से अधिक विधायकों ने इस वर्ग से पूरी तरह से दूरी बनाई । खास करके विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के बड़ी संख्या में विधायकगण अपने क्षेत्र की उपेक्षा के कारण इस वर्ग से दूर रहे। मध्य प्रदेश की भाजपा अब वीडी शर्मा जी की “न्यू भाजपा “बन चुकी है ,जिसे वह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं।

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इतना ही नहीं नरेंद्र सलूजा ने आगे कहा कि पहली बार भाजपा के किसी वर्ग में वरिष्ठ नेताओं को पूरी तरह से दरकिनार किया गया, उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया।उमा भारती, विक्रम वर्मा, सुमित्रा महाजन ,कृष्ण मुरारी मोघे जैसे कई वरिष्ठ नेताओं को इस वर्ग से पूरी तरह दरकिनार किया गया ,उनकी उपेक्षा की गयी ,उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया।जबकि आमतौर में भाजपा के हर वर्ग में सभी वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देकर विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है। वर्तमान भाजपा संगठन की कार्यशैली से कई वरिष्ठ नेता नाखुश हैं ,कई विधायक नाखुश हैं इसलिए उन्होंने इस प्रशिक्षण वर्ग से पूरी तरह से दूरी बनायी।

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नरेंद्र सलूजा  ने कहा कि बड़ी शर्म की बात है दिल्ली की सीमाओं पर 75 दिन से अधिक से चल रहे किसान आंदोलन को लेकर इस वर्ग में कोई चर्चा नहीं की गई और 220 से अधिक किसानों की मौत को लेकर शोक संवेदना या कोई शोक प्रस्ताव भी पारित नहीं किया गया। भाजपा का यह प्रशिक्षण शिविर सिर्फ नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों तक ही सीमित रहा और इसे उज्जैन में आयोजित करने के पीछे पिछले विधानसभा चुनाव में मालवा में हुई भाजपा की करारी हार वास्तविक कारण है।