इस सीट से हो सकती है सिंधिया की पत्नी की राजनीति में एंट्री

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भोपाल/गुना। मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। एक बार फिर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्यि सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया के चुनाव लड़ने की अटकलें जोरों पर हैं। इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने अपना वोटर आईडी का पता बदलवाया था। तब भी इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी राजनीति में एंट्री हो सकती है। अब लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर इस बात ने जोर पकड़ लिया है। सिंधिया को महासचिव बनाने के बाद पश्चिम यूपी का प्रभार मिला है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस उन्हें यूपी की किसी सीट से टिकट दे सकती है। 

अगर ऐसा होता है तो फिर उनकी वर्तमान गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट खाली हो जाएगी। इस सीट पर दशकों से सिंधिया घराने का ही प्रतिनिधित्व रहा है। इसलिए उनकी पत्नी को इस सीट से उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठ रही है। हालांकि, गुना दौरे पर आए सिंधिया से जब इस बारे में सवाल पूछा गया कि क्या उनकी पत्नी लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने सवाल के जवाब में कहा कि ये निर्णय पार्टी हाईकमान लेता है कौन किस सीट से और कहां से चुनाव में उम्मीदवार होगा। पार्टी जैसा फैसला करेगी हम उसका पालन करेंगे।  कांग्रेस पार्टी जो भी तय करेगी उसके आधार पर कार्य करूंगा।

दो दिन पहले भी ग्वालियर में हुई बैठक में इस बात पर चर्चा हुई थी कि अगर सिंधिया सीट बदलते हैं तो उनकी जगह वह अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनवाएं। वहीं पदाधिकारियों ने अपनी राय देते हुए कहा कि इस सीट से या तो सिंधिया खुद लड़े या उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया को चुनाव लड़ाया जाए। पदाधिकारियों ने यह फैसला सिंधिया पर छोड़ दिया। अब ग्वालियर सीट से प्रत्याशी का चयन कांग्रेस महासचिव और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगें।

इस दौरान हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए भाजपा के तीनों बागी नेता भी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा से बगावत कर चुके पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मलकीत सिंह संधु, पूर्व विधायक राव राजकुमार सिंह यादव, बीजेपी नेता व पूर्व विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने एक दिन पूर्व ही भोपाल में सिंधिया से मुलाकात कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। इन नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने पर सिंधिया ने कहा कि यह केवल इन नेताओं को सम्मान नहीं है, पार्टी का भी सम्मान है. इनके कांग्रेस में आने से पार्टी का भी सम्मान बढ़ा है।