शिवराज ने विस में उठाया माखनलाल का मामला, मंत्री बोले ‘देश भर के आंदोलन पर चुप क्यों थे’

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और विधायक नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा में शून्यकाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से छात्रों को निष्कासित किए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि जानकारी बुला रहे हैं। हम भी छात्र राजनीति से आए हैं, गलत नहीं होने देंगे। वहीं, उच्चा शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने पूर्व सीएम शिवराज पर पलटवार करते हुए कहा कि शिवराज देश भर के छात्र आंदोंलनों के बारे में चुप क्यों है। उस पर कुछ क्यों नहीं बोलते। 

मंत्री जीतू ने कहा कि, ‘ये वो लोग है जो हर तरह की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहयोग देंगे। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनेंगे। पूरा मामला क्या है मेरी जानकारी में नहीं है कि किन तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हुई है, निष्कासन की कार्रवाई अंतिम विचार होता है। निष्कासन पर पुर्नविचार करना चाहिए। प्रोटेस्ट के नीतिगत मुद्दे क्या थे। किस कारण आांदोलन किया गया। मामले को सीएम के संज्ञान में लाना चाहिए। वहीं जहां तक पूर्व सीएम शिवराज सिंह के बयान का मामला है तो वो देश भर के छात्र आंदोंलनों के बारे में चुप क्यों है। उस पर कुछ क्यों नहीं बोलते।’

गौरतलब है कि दो प्रफेसर के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ के चलते मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के 23 छात्रों को निष्कासित कर दिया गया। छात्रों पर प्रदर्शन के दौरान अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। यूनिवर्सिटी के दो सहायक प्रफेसर द्वारा कथित जातिवादी ट्वीट के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया था। 

आदेश की कॉपी में लिखा है, ‘जब वीसी दीपक तिवारी वापस आए तो स्टूडेंट्स अगले दिन धरने पर बैठ गए। इस दौरान कुछ छात्रों ने दोबारा से तोड़फोड़ की। वीसी ने पुलिस को बुलाया जिसके बाद पुलिस और छात्रों में बवाल हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों की चोटें आईं। 10 छात्रों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई। अब एफआईआर में 13 नाम और जोड़े गए हैं।’

रजिस्ट्रार ने आगे कहा, ‘सीसीटीवी फुटेज देखकर इस मुद्दे पर चर्चा हुई जिसके बाद अनुशासनात्मक समिति ने निष्कर्ष निकाला कि छात्रों के दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता को देखते हुए सख्त कार्रवाई होनी जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की दोबारा कोई हरकत न हो।’ निष्कासित किए गए छात्रों में से एक रजनीश तिवारी ने कहा, ‘हमें निष्कासन की सूचना मिली है। अब आगे क्या करना है, इस पर हम फैसला लेंगे लेकिन जो भी होगा शांतिपूर्ण और कानूनी रूप से होगा। हमें इस बात का दुख है कि दोनों प्रफेसरों के बजाय हमें सजा दी गई है। ये प्रफेसर स्टूडेंट्स को जाति आधार पर बांटते हैं और जातिवादी टिप्पणी करते हैं लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया।’

निष्कासित किए गए छात्रों के नाम सौरभ कुमार, प्रखरादित्य द्विवेदी, राघवेंद्र सिंह, आशुतोष भार्गव, अभिलाष ठाकुर, अर्पित शर्मा, रवि भूषण सिंह, अंकित शर्मा, अर्पित दुबे, सुरेंद्र चौधरी, विवेक उपाध्याय, शुभम द्विवेदी, अंकित कुमार चौबे, आकाश शुक्ला, अनूप शर्मा, प्रतीक वाजपेयी, विपिन तिवारी, राहुल कुमार, रवि शर्मा, मोनिका दुबे, नीतीश सिंह और विधि सिंह है।