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भोपाल।

लोकसभा चुनाव में इस बार हर प्रत्याशी को 50  से 70 लाख रुपए तक खर्च करने की अधिकतम छूट है। लेकिन एमपी की 29  सीटों में से कई ऐसी हाईप्रोफाइल सीटे है जिनपर लिमिट से ज्यादा खर्च किए जाने की संभावना है। चुंकी छह सीटों पर मतदान हो चुका है बाकी 23  पर होना है, ऐसे में विभाग को शंका है कि अपने वोटरों को रिझाने और लुभाने प्रत्याशियों द्वारा धन- संसाधनों का भरपूर उपयोग किया जा सकता है। जिन पर अब आयकर विभाग की नजर है।बता दे कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी कई सीटे आयकर की रडार पर रही थी और कई प्रत्याशी आयोग के निशाने पर भी आ गए थे।

खबर है कि विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों और संसदीय क्षेत्रों में 24 घंटे अपनी टीम तैनात की है लेकिन इन क्षेत्रों में निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई है। इन चुनाव क्षेत्रों में कालेधन की आवाजाही पकड़ने के लिए विभाग की खुफिया विंग को भी सक्रिय किया गया है।बताया जा रहा है कि इससे पहले चुनाव आयोग ने भी आयकर विभाग को इंदौर और छिंदवाड़ा सीट सहित 28 विधानसभा क्षेत्रों पर निगरानी का मशविरा दिया था।जिसके बाद आयकर की टीम अलर्ट हो गई है।इन क्षेत्रों में सभी संभावित स्थानों की निगरानी के अलावा व्यावसायिक संस्थानों, बैंक और बड़े आर्थिक लेनदेन के केंद्रों पर भी नजर रखी जा रही है। राज्य एवं केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां भी हर दिन वित्तीय लेनदेन की जानकारी एवं संदिग्ध लेनदेन संबंधी ‘इनपुट” आयकर विभाग के साथ साझा करती हैं।

ये हैं प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीटें

भोपाल, इंदौर, सतना, मंदसौर, रतलाम, खजुराहो, राजगढ़, उज्जैन, खंडवा और सागर सीट 

इधर दिग्विजय और प्रज्ञा को नोटिस जारी

वही भोपाल संसदीय क्षेत्र में चुनाव खर्च के मामले में सबसे आगे निकलती हुई नजर आ रही है। जिला निर्वाचन कार्यालय की मॉनीटरिंग के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने 39.47 लाख तो भाजपा की साध्वी प्रज्ञा ने अबतक 13.51 लाख रुपए खर्च कर दिए है। जबकी दिग्विजय सिंह ने अपना चुनावी खर्च 21.30 लाख तो प्रज्ञा ने 6.27 लाख रुपए बताया है। लिहाजा चुनाव आयोग द्वारा चुनाव खर्च का हिसाब रखने वाले शेडो रजिस्टर से दिग्विजय सिंह ने 18.17 लाख तो प्रज्ञा ने 7.24 लाख रुपए का कम खर्च होना बताया है।इस उलझते आंकडों के चलते आयोग ने दोनों प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर ४८ घंटों में जवाब मांगा है।