कमलनाथ के मंत्री के बयान पर पुलिस अधिकारी ने उठाए सवाल

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भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला को सीबीआई प्रमुख बनाए जाने के बाद सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।  कांग्रेस लगातार हमले कर रही है। शनिवार को मल्लिकार्जुन खड़गे के बाद अब रविवार को कमलनाथ सरकार में सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने ऋषि कुमार शुक्ला के खिलाफ बेहद विवादित बयान दिया है।उन्होंने कहा है कि शुक्ला अयोग्य, असफल अफसर हैं। मैं समझता था कि वह ग्वालियर-चंबल संभाग के शेर होंगे, लेकिन मैंने पाया कि भेड़िया शेर की खाल में बैठा है।वही  भौंरी पुलिस अकादमी में पदस्थ इंस्पेक्टर और राष्ट्रीय कवि  मदन मोहन समर ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कई सवाल खड़े किए है। साथ ही उन्होंने दिग्विजय शासन काल में मुलताई कांड और अपराधों को भी याद दिलाया।

दरअसल, रविवार को मीडिया से चर्चा के दौरान सिंह ने शुक्ला की नियुक्त पर सवाल उठाते हुए कहा कि शुक्ला अयोग्य, असफल अफसर हैं। मैं समझता था कि वह ग्वालियर-चंबल संभाग के शेर होंगे, लेकिन मैंने पाया कि भेड़िया शेर की खाल में बैठा है। शुक्ला के डीजीपी रहते मप्र में जाति के आधार पर आंदोलनरत लोगों की हत्या हुई। व्यापमं और मोदी सरकार के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए शुक्ला की नियुक्ति की गई है।गोविंद सिंह ने कहा कि वो बतौर कांग्रेस विधायक विपक्ष में रहते हुए पिछले डेढ़ साल से ऋषि कुमार शुक्ला की कार्यप्रणाली का विरोध करते आ रहे हैं। मैने एक साल पहले भी विधानसभा में बतौर डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए थे, जोकि विधानसभा के रिकॉर्ड में भी दर्ज है। जो व्यक्ति प्रदेश नहीं चला सका, वो सीबीआई को कैसे संभालेगा? उनके इस बयान के बाद सियासी भूचाल मच गया है। भाजपा हमलावर हो चली है। वही पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी बयानबाजी करने से पीछे नही हट रहे है।

मंत्री के बयान पर समर ने उठाए सवाल

वही  भौंरी पुलिस अकादमी में पदस्थ इंस्पेक्टर और राष्ट्रीय कवि  मदन मोहन समर ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कई सवाल खड़े किए है।समर ने क्राइम कंट्रोल वाट्स ग्रुप के जरिए उनके बयान पर आपत्ति जताई है। साथ ही दिग्विजय शासन काल में मुलताई कांड और अपराधों को भी याद दिलाया।  इंस्पेक्टर मदन मोहन समर ने कहा है कि गोविंद जी ऋषि होना आसान नही है।आपके बयान से एक मंत्री की व्यक्तिगत कुंठा प्रदर्शित करती है। हर घटना के लिए मुख्यमंत्री विभागीय मंत्री मुख्य सचिव उत्तरदायी नहीं होता तो डीजीपी भी नही होते। वही समर ने गोविंद को दिग्विजय शासन काल की याद दिलाते हुए कहा कि गोविंद सिंह जब आप गृहमंत्री थे तो प्रदेश में जघन्य अपराध हुए थे। 1998 को मुलताई में 22 किसानों की मृत्यु का जिम्मेदार कौन था, उनमें दलित भी थे पिछड़े भी थे। जिम्मेदार पदों पर रहने वाले व्यक्ति को कुंठित नहीं होना चाहिए।