अविस्मरणीय हैं पिछले साल लॉकडाउन की दुश्वारियां, मजदूरों में डर का माहौल, पलायन तेज

याद हो कि पिछले लॉकडाउन में एक मजदूर की बेटी अपने पिता को साइकल पर बैठाकर हरियाणा से बिहार लगभग 1200 किमी दूर अपने गांव ले जाने पर मजबूर हो गयी थी।

मजदूरों का पलायन

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। देश के मजदूरों में एक बार फिर कोरोना (corona) के चलते लाॅकडाउन (lockdown) लगने का खौफ है। कोरोना से हालात बिगड़ते हुए नज़र आ रहे हैं। कोरोना रिटर्न्स खुद ही अपने सारे रिकॉर्ड (record) तोड़ रहा है। ऐसे में एक तरफ जहां वैक्सिनेशन प्रोग्राम (vaccination program) को तेज कर दिया गया है वहीं लॉकडाउन के भी संकेत मिल रहे हैं। इसका सबसे ज़्यादा डर मजदूरों (labourers) को सता रहा है। पिछले साल लॉकडाउन के बाद मजदूरों को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। याद हो कि पिछले लॉकडाउन में एक मजदूर की बेटी अपने पिता को साइकल पर बैठाकर हरियाणा से बिहार लगभग 1200 किमी दूर अपने गांव ले जाने पर मजबूर हो गयी थी। और ऐसे हजार किस्से हुए थे जिनमें से कुछ हमें पता चल पाए, कुछ नहीं। अब एक बार फिर से कोरोना की रफ्तार को देखते हुए लॉकडाउन लगने की संभावना जताई जा रही है। जिसके चलते मजदूर काफी चिंतित हैं और लॉकडाउन से पहले अपने घर पहुंच जाना चाहते हैं।

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बता दें कि मजदूरों का सबसे ज़्यादा पलायन उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ हो रहा है। जिस वजह से यूपी, बिहार के लिए चलने वाली ट्रेनें खचाखच भरी हुई हैं। ट्रेन के कोचों में जगह मिलना मुश्किल हो गया है। महाराष्ट्र से लौटने वाले मजदूरों ने बताया कि महाराष्ट्र में लॉकडाउन लगने के बाद वहां सभी काम बंद हैं जिसके चलते उनके पास पैसों की किल्लत हो गयी है। इस वजह से मजबूरी में उन्हें अपने घर लौटना पड़ रहा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक मजदूरों ने पिछले साल लॉकडाउन के बाद उनकी दयनीय स्थिति को याद करते हुए इस बार लॉकडाउन लगने से पहले ही घर जाने का निर्णय ले लिया है। महाराष्ट्र से लौटने वाले मजदूरों के अनुसार पिछले साल लॉकडाउन में उन्हें लगभग 40 दिनों तक मांग-मांग कर पेट भरना पड़ा था। महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाते हुए मजदूरों ने कहा कि वहां की सरकार को हमारी कोई फिक्र नहीं है।