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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। निकाय चुनाव (Municipal Election), पंचायत चुनाव (Panchayat Election 2021) और दमोह उपचुनाव (Damoh By-election) से पहले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में BJP और कांग्रेस (Congress) ने किसानों को साधना शुरु कर दिया है।देश में चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protest) के बीच हर कोई अन्नदाता को रिझाने में लगा हुआ है। एक तरफ कांग्रेस ने 1 अप्रैल से अन्नदाता की समस्या सुनने के लिए कॉल सेंटर की शुरुआत की है वही दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 3 अप्रैल को प्रदेश के किसानों के साथ संवाद करेंगे।

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खास बात ये है कि यह कार्यक्रम किसान संघ के बैनर तले किया जाएगा।इस किसान चौपाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(Chief Minister Shivraj Singh Chauhan)  प्रदेश भर के करीब 120 किसानों से चर्चा करेंगे और उनकी समस्याओं को सुन समाधान निकाला जाएगा। इस दौरान सीएम अधिकारियों-मंत्रियों को भी जल्द से जल्द किसानों की समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दे सकते है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खेती किसानी(Farmers) से संबंधित प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों राजस्व, कृषि, विद्युत, सहकारिता पशुपालन, जल संसाधन आदि की योजनाओं एवं नियमों में जमीनी स्तर पर क्या कमियां है, उनको कैसे सुधारा जा सकता है कि वह जनउपयोगी, सुविधाजनक एवं शोषण रहित बन सके।

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भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र पालीवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय किसान संघ के भोपाल (Bhopal) मुख्यालय पर आयोजित इस आयोजन में मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले से भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष, महामंत्री और तीनों प्रांतों की प्रांतीय कार्यकारिणी के साथ प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहेंगे।

3 अप्रैल को महाकौशल प्रांत के 20 जिलों के अध्यक्ष व महामंत्री भोपाल में आयोजित संवाद कार्यक्रम में सम्मिलीत होकर मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याओं को रखेंगे। इस संवाद कार्यक्रम में महाकौशल प्रांत से प्रांत अध्यक्ष विजय गोन्टिया, प्रदेश कोषाध्यक्ष ओमनारायण पचौरी, प्रांत महामंत्री नारायण सिंह पटेल, प्रांत मंत्री प्रहलाद पटेल, जिलाध्यक्ष मोहन तिवारी, जिला मंत्री रामदास पटेल, आलोक पटेल सहित अन्य 20 जिलों के अध्यक्ष व मंत्री भोपाल जायेंगे।

अब देखना दिलचस्प होगा कि किसान का रुख किस तरफ रहता है।वह शिवराज सरकार (Shivraj Government) की योजनाओं और मुख्यमंत्री की तरफ आकर्षित होता है या फिर कर्जमाफी (Debt Waiver) का वादा लेकर 15 साल बाद सत्ता में आई और 15 महिनों में ही बाहर हुई कांग्रेस पर विश्वास करता है।