केंद्र के खिलाफ दिल्ली में ताकत दिखाएगी MP कांग्रेस, प्रदेश में भी होगा हल्ला बोल

भोपाल। केंद्र की मोदी सरकार को आर्थिक मोर्चे पर घेरने के लिए मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने के लिए गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सभी जिलों के अध्यक्षों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ समेत प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया भी मौजूद रहे। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस द्वारा केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की तैयारी की जा रही है। इसी सिलसिले में प्रदेश से भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली भेजा जाएगा। 

मुख्यमंत्री नाथ ने दिल्ली में करीब 50 हज़ार से अधिक कार्यकर्ताओं को भेजने का टारगेट सभी जिला अध्यक्षों को दिया है। पार्टी का मानना है कि देश के हालातों को जनता के सामने रखने के लिए दिल्ली में व्यापक स्तर पर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करना होगा। कांग्रेस इस प्रदर्शन के सहारे अपने हक में माहौल तैयार करना चाह रही है। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से पार्टी के सामने संगठन में जोश पैदा करने की चुनौती है। यह प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक का काम बन गया है। इसलिए कांग्रेस का मानना है कि कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने के साथ ही मोदी सरकार की विफलताओं को जनता के सामने पेश करने के लिए यह सही तरीका होगा। 

बैठक में सीएम ने दिए यह खास आदेश

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कांग्रेस जिला अध्यक्षों को बैठक में सभी जिलों में 25 नवंबर को केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने के लिए कहा है। इसके अलावा उन्हें 14 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले आंदोलन में भी भारी संख्या में शामिल होने को कहा गया है। बैठक में कांग्रेस सरकार के एक की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के काम भी सौंपा गया है। 

बैठक में जिला अध्यक्षों की लगी अटेंडेंस

राजधानी स्थित पीसीसी कार्यालय में प्रदेश भर से आए कांग्रेस जिला अध्यक्षों की अटेंडेंस प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने लगाई। जो इस बैठक में शामिल नहीं हुए हैं उनकी अलग से लिस्ट तैयार की जाएगी। बैठक में कांग्रेस नेताओं ने संगठन और सत्ता के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है। जिला अध्यक्षों ने पीसीसी के रवैये को लेकर भी बाबरिया से शिकायत की है। यही नहीं उन्होंने मंत्रियों द्वारा उनकी सुनवाई नहीं किए जाने की शिकायत भी की। जिस पर बाबरिया ने कहा कि जो मंत्री संगठन के बूते पर जीते हैं उन्हें  कार्यकर्ताओं की सुनवाई करनी होगी। अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती है तो पार्टी यह बर्दाश्त नहीं करेगी।